दिनाँक_16_06_2026विषय_रानी_लक्ष्मी_बाईस्वरचित चूडिय़ां ही नहीं उसने हाथो में तलवार भी धारी हैं lआजादी पाने चल पडी अकेले वो झाँसी की रानी है भारत की वो शान रानी लक्ष्मी बाई नाम से जानी जाती हैं lममता त्याग और देश प्रेम की उसमें बहती पावन धारा है lम...

दिनाँक_15_06_2026विषय_खोटा_सिक्का स्वरचित जिसे समझा जाता है बेकार वही लाज बचाता हैं lकल तक जेब की शान बढ़ाता आज वो खोटा सिक्का कहलाता है lसमय समय की बात हैं और समय सबका आता है पर इस दुनिया में कोई भी चीज़ बेकार नहीं होती है lपरखने वाली नजरे होनी च...

#दिनाँक_14_06_2026#विषय_विश्व_रक्तदाता_दिवस#स्वरचित रक्तदान करने वाले उस निस्वार्थ वीर का करते हैं सम्मान lना दिन देखते ना रात रक्तदाता है वो करते रहते रक्तदान lबिना जान पहचान के अपनो सा फर्ज निभाकर करते रक्तदान lआज उस महादानी रक्तदानी वीर का करते...

#दिनाँक_04_06_2026#विषय_साहस#स्वरचित गिरना तो शुरुआत है गिर कर सम्भलने की तो क्या ही बात हैं lउठ ज़रा फिर से कदम बड़ा अभी है धरती पर छूना आकाश है चुनौतियों के पहाड़ चढ़ जा तेरा साहस ही तेरी पहचान है lदूर कर बाधाओं के हर पत्थर सफलता करेगी तुझे सलाम...

#विषय_साहस#स्वरचित गिरना तो शुरुआत है गिर कर सम्भलने की तो क्या ही बात हैं lउठ ज़रा फिर से कदम बड़ा अभी है धरती पर छूना तो आकाश है lहौसला रख चुनौतियों के पहाड़ चढ़ जा तेरा साहस ही तेरी पहचान है lदूर कर बाधाओं के हर पत्थर सफलता करेगी तुझे सलाम है l...
#स्वरचित "मेरे पापा की साइकिल" मेरे पापा की साइकिल दो पहियों की गाड़ी नहीं यादो का सागर थी lउसके आगे की टोकरी या छोटी बेबी सीट पर बैठ निकली सवारी थी lना उसके गियर ना उसको पेट्रोल डीज़ल या गैस की कोई चाहत थी lट्रिनट्रिन बजाकर घंटी उसकी जब पापा बाहर...

#विषय वो परिवार के साथ गर्मी की छुट्टियाँ#विधा संस्मरण वो परिवार के साथ गर्मी की छुट्टी तब गर्मी में परीक्षा खतम होते ही 2 से तीन महीनों की छुट्टियाँ रहती थी l आजकल तो 15 से 20 दिन की छुट्टी होती थोड़े दिन स्कूल होते फिर छुट्टी होती l छुट्टियों के...

विषय_रिश्ते निभाना स्वरचितइक शिद्दत से जो निभाते हैं रिश्तेउन्हीं रिश्तों में इक उम्र बीता आते है lछोड़ के जाने वाले तो साथ होते भी छोड जाते है निभाने वाले तो बेवजह भी निभा जाते हैं lllक्यूंकि??जिन्हें होती रिश्तों की कदर उन्हें हर हाल में रिश्ते ...
#दिनाँक_11_06_2026#विषय_इतिहास_के_पन्नों_से महाभारत की वह सभा आज भी पुरुष समाज पर कालिख है lजहां शक्तिशाली पुरुष वर्ग ने स्त्री केअपमान पर साधी चुप्पी हैं lद्रोपदी के चीर हरण के साथ-साथ महाबलीयो के मौन ने गहरी चोट मारी हैं lभरी सभा में स्त्री की ल...

#दिनाँक_12_06_2026#विषय_अर्थ_का_अनर्थ#स्वरचित शब्दों का खेल निराला हैं छोटी सी गलतफहमी में बदलता हर नज़ारा हैं lकहना था कुछ समझा गया कुछ बात का बतनगड बन गया मन मे दीवार हैं lशब्दों के हेरफेर से नासमझी के मेल से अपना ही अपनों से ख़फ़ा हैं lबिना सोच...

#दिनाँक_13_06_2026 #विषय_ध्वनि_प्रदूषण #स्वरचितआधुनिकता की दौड़ में मोटर गाड़ियां के शोर में lखो जाती है चिडियों की चहचहाहट नए दौर में lहर तरफ शोर है मशीनों की आवाजों का शोर है lभारी भरकम डीजे की आवाज पर गूंजता हर छोर हैं lकानों में चुभती के हॉर्न...
दिनाँक_03_06_2026#विषय_विरासत #स्वरचित वो गाँव के कच्चे मकान की मिट्टी की सोंधी खुशबु पुरखों का है वरदान lवो सिर्फ ईंट और मिट्टी का ही घर नहीं है इसमें यादों का है बसेरा lमाता पिता की सीख का मेरी रगों में बहता सदियों का स्वाभिमान lकहानियाँ जो दादा...

मेरी माँ का जीवन माँ का घर है ये,मायका है मेरा l कच्चे घर मे मिट्टी से माँ ने चूल्हा एक.बनाया lमिट्टी को अपने हाथों से गुंथ कर दीवारों को सजाया l सारी उम्र भागम-भाग में खुद को कभी ना सजाया lचौकड़ी पर बैठ कर अपनी फूंक से चूल्हा माँ ने सुलगाया lलकड़...

दिनाँक_02_06_2026स्वरचित जिस घर को बनाने में उस पिता की जिंदगी निकल गई lउस घर को सजाने संवारने में माँ की पूरी उम्र गुजर गई lछोटे से बड़े हुऐ बच्चे सभी हसते खेलते जिंदगी बन गई l दिनरात गूंजती हँसी किलकारी वहाँ अब खामोशी बस गईं lथा यह घर सपनो का अप...

दिनाँक_29_05_2026विषय_लाल_सूरज_का_काल जब होती सूर्यास्त की बेला उसे कहते,लाल सूरज का काल तपता सूरज दिन भर धरती को तपाता हों जाता लालम लाल lहर चढ़ान के बाद उतार आता,बतलाता लाल सूरज का काल l आग उगलता सूरज अब अस्त हो रहा,जो आएगा फिर कल lदिन भर का थका...

#दिनाँक_02_06_2026#विषय_आओ_कदम_बढ़ाए_प्यासे_विहंगो_की_ओर l#स्वरचित तप रही धरती आसमान भी लाल है lआग उगल सूरज ने किया कमाल है lगर्मी पड़ रही सबका हाल बेहाल है lआओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर lउन्हें दाना पानी दे जीवन बचाना है lउड़ते उड़ते थक कर गल...

कुछ तुम लिखो कुछ हम लिखे दिनाँक_29_05_2026विषय-दो पीढ़ियों का अन्तरस्वरचितदो पीढ़ियों का अन्तर सिर्फ उम्र का फासला ही नहीं है lसोच तकनीक और जीने के तरीके का बदलाव भी है lवो रिश्ते निभाते मिल जुल कर रहते संयुक्त परिवार बसाते हैं lहम हम दो हमारे दो ...

#दिनाँक_02_06t_2026#विषय_तू है तो कही न कही "तू है तो कहीं न कही"ये एहसास मुझे होता है lसामने नहीं पर तेरा साया हमेशा मेरे आसपास होता है lतू दुनिया के किसी भी कोने में हो तेरा अक्स मुझमें रहता है lफासले दोनों के दरमियाँ,मै इस जंहा तू उस जंहा में र...

#दिनाँक_02_06_2026#विषय_स्वर्णिम#स्वरचित तुम्हारें पसीने की हर बूंद जब मोती सी चमकेगी lसंकल्प की दृढ़ शक्ति मन मे हो स्वर्णिम छवि निखरेगी lबीत गया जो वो कल था आने वाले कल में सफलता मिलेगी lअंधकार को दूर कर खुशियो की जीवन में नई ज्योति जलेगी lअपने ...
दिनाँक_27_05_2026#विषय_दहेज#स्वरचित बेटी भी दो और दौलत भी दो दुनिया ने कैसी ये रीत बनाई lदहेज के दानवों ने बेटीयों की खुशियो की बोली लगाई lपिता नें सब दिया पर लालची निगाहों को कमी नजर आई lतिल तिल जलती तानों के तीर सहती अपना फर्ज वो निभाई lभूखे दान...

दिनाँक_21_05_2026 #स्वरचित "प्रेम और एक कप चाय"चाय सिर्फ एक पैय नहीं एक अह्सास है iहर दिल के,हर महफिल की ये खास है iअमिर हो या गरीब सब के घर की शान है lछोटा हो या बड़ा सबकी इसमें बसती जान है lहर घर मे माँ की चाय हमारे घर मे पापा की चाय का जलवा है ...

दिनाँक_21_05_2026स्वरचित एक इंसान जिससे मेने बहुत कुछ सीखा "पापा" हैं l यह जीवन एक बहती धारा कभी धूप कभी ठंडी छाया है बचपन की अल्हड किलकारी जवानी में जिम्मेदारी भारी lबुढ़ी आँखों में अब सन्नाटे जीवन भर संघर्ष में जो काटे है lजिंदगी में कभी है सुख ...

विषय_चुपके_चुपकेस्वरचित दिल मेरा चुपके चुपके कहीं खो जाता है lतन्हा अकेला रातों में अकेला रोता है lखामोशी से यादों मे माँ की खो जाता हैं lकभीअलमारियों में रखे सामान में उसे ढूँढता हैं lकभी उनकी लोरियों को याद कर मायूस हो जाता है l शिकवे शिकायत भी ...

#विषय_भीगी_भीगी_एक_शाम#स्वरचित वो भीगी भीगी एक शाम थी आँखों में कुछ नमी थी lबरसती बूँदों के साथ बहती यादो की झड़ी थी lमिलने की खुशी और तेरे दीदार की आरज़ू थी lएक बार मिलने को सालों का इंतजार बहुत बड़ा था lहर पल भारी लगता था मानो वक्त जेसे रुक जाता...

दिनाँक_19_05_2026विषय_पत्थरस्वरचितपत्थर हूँ मैं मुझमें भी नमी हैं दर्द मुझे भी होता है पर सब समझते मुझमे ये कमी है lछेनी हथौड़े की मार जब पडी दर्द मुझे भी होता पर उफ्फ भी नहीं करता मेरा दर्द मुझमे दबा है lमेरा रूप बदल बदल मुरत बनाई जाती कल तक पैरो...

यह जीवन एक बहती धारा कभी धूप कभी ठंडी छाया है बचपन की अल्हड किलकारी जवानी में जिम्मेदारी भारी lबुढ़ी आँखों में अब सन्नाटे जीवन भर संघर्ष में जो काटे है lजिंदगी में कभी है सुख के फूल तो कभी दुख के काँटे भी lजीवन तो चलते जाना हैं राहों में चाहें मुश...
