
#दिनाँक_12_06_2026
#विषय_अर्थ_का_अनर्थ
#स्वरचित
शब्दों का खेल निराला हैं छोटी सी गलतफहमी में बदलता हर नज़ारा हैं l
कहना था कुछ समझा गया कुछ बात का बतनगड बन गया मन मे दीवार हैं l
शब्दों के हेरफेर से नासमझी के मेल से अपना ही अपनों से ख़फ़ा हैं l
बिना सोचे शब्दों का तीर जुबान से जो निकल गया अर्थ का अनर्थ हुआ प्यार भरा दिल टूट गया l
तोल कर बोलो सोच समझ कर बोलो जल्दबाजी में अमृत में विष मत घोलो l
शब्द हैं अनमोल सम्भल कर बोलो बोलने से पहले थोड़ा और तुम ठहरो l
काजल मनीष जैन
राजस्थान