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एक इंसान जिससे मेने बहुत कुछ सीखा

दिनाँक_21_05_2026

स्वरचित

एक इंसान जिससे मेने बहुत कुछ सीखा "पापा" हैं l

यह जीवन एक बहती धारा कभी धूप कभी ठंडी छाया है

बचपन की अल्हड किलकारी जवानी में जिम्मेदारी भारी l

बुढ़ी आँखों में अब सन्नाटे जीवन भर संघर्ष में जो काटे है l

जिंदगी में कभी है सुख के फूल तो कभी दुख के काँटे भी l

जीवन तो चलते जाना हैं राहों में चाहें मुश्किल हजार है l

क्या लेकर आए क्या लेकर जाना हैं जीवन तो आना जाना है l

जीवन की बहती धारा में बचपन से बुढ़ापा तक बहते जाना है l

माँ की गोद स्कूल कॉलेज नोकरी गृहस्थी और फिर श्मशान ठिकाना है l

मिट्टी का सुन्दर खिलौना एक दिन फिर मिट्टी में मिल जाना है l

सुख होया दुख जीवन मे हार कभी ना मानना बस आगे बढ़ते जाना है l

काजल मनीष जैन

राजस्थान

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