
विषय_चुपके_चुपके
स्वरचित
दिल मेरा चुपके चुपके कहीं खो जाता है l
तन्हा अकेला रातों में अकेला रोता है l
खामोशी से यादों मे माँ की खो जाता हैं l
कभीअलमारियों में रखे सामान में उसे ढूँढता हैं l
कभी उनकी लोरियों को याद कर मायूस हो जाता है l
शिकवे शिकायत भी करे किससे वक़्त का दिया दर्द है l
घाव गहरा है वक़्त भी मरहम नहीं लगा सकता है l
उनकी चीजे देखकर यादो में खोकर दिल सुकून पा जाता है l
काजल मनीष जैन
राजस्थान