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आओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर

#दिनाँक_02_06_2026

#विषय_आओ_कदम_बढ़ाए_प्यासे_विहंगो_की_ओर l

#स्वरचित

तप रही धरती आसमान भी लाल है l

आग उगल सूरज ने किया कमाल है l

गर्मी पड़ रही सबका हाल बेहाल है l

आओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर l

उन्हें दाना पानी दे जीवन बचाना है l

उड़ते उड़ते थक कर गला उनका सूखा है l

जेठ की गर्मी में हर पंछी भूखा है l

धरती तप रही आग उगलता आकाश है l

आओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर l

उन्हें दाना पानी दे जीवन बचाना है l

बेजुबान विहंगो की आँखों में प्यास का दर्द है l

छोटा ही सही पर एक फर्ज निभाना है

एक बर्तन में पानी रख कर प्यास बुझाना हैं l

आओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर l

उन्हें दाना पानी दे जीवन बचाना है l

उनके जीवन की डोर को खुशियो से सजाना है l

ना धन दौलत की आवश्यकता करुणा भाव रखना है l

तड़प कर मर जाते प्यासे उन्हें हमारा ही सहारा है l

आओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर l

उन्हें दाना पानी दे जीवन बचाना है l

दे दो जीवन दान इन्हें जीव ये तो बेसहारा है l

मानवता का परिचय दो,धर्म ये सीखाता है l

दूसरों को जो जीवन दो यही सत्कर्म में आता है l

आओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर l

उन्हें दाना पानी दे जीवन बचाना है l

एक सकोरा पानी भरो कुछ दाने रखो अनाज l

सेवा कर उन पंछियों की आशीष मिले हज़ार l

नेकी करो जीवन मे सुखी बने तुम्हारा संसार l

आओ कदम बढ़ाए प्यासे विहंगो की ओर l

उन्हें दाना पानी दे जीवन बचाना है l

काजल मनीष जैन

राजस्थान

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