
दिनाँक_16_06_2026
विषय_रानी_लक्ष्मी_बाई
स्वरचित
चूडिय़ां ही नहीं उसने हाथो में तलवार भी धारी हैं l
आजादी पाने चल पडी अकेले वो झाँसी की रानी है
भारत की वो शान रानी लक्ष्मी बाई नाम से जानी जाती हैं l
ममता त्याग और देश प्रेम की उसमें बहती पावन धारा है l
ममता की मुरत है वो बेटे की रक्षा की उसने ठानी है l
बांध पीठ पर बेटे को बरछी ढाल तलवार साथ घोड़े की सवारी हैं l
दिखाया रौद्र रूप खदेड़ा फिरंगियों को रन चंडी वो बन जाती है l
देख फिरंगी उसको थर-थर कांपे वो जब रण में आती हैं l
नाम रानी लक्ष्मी बाई नाना साहेब की दुलारी ने देश प्रेम की ठानी हैं l
नाम अमर हो गया उसका उसने जान अपनी देश पर वारी हैं l
दे दिया बलिदान प्राणों का अपने भारत की वो अनमोल कहानी हैं l
आज भी नारी कमजोर नहीं अन्याय से जंग उनकी आज भी जारी है l
हर आँचल में क्रांति है हर चूडी में हुंकार कमजोर अबला वो नहीं है l
समाज की रूढ़ीवादी सोच से,अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए जंग जारी है l
जो विषम परिस्थितियों में जागे,हर स्त्री में बसा रानी लक्ष्मी बाई का अंश है l
स्त्री सिर्फ कोमल काया ही नहीं विपदा मे शक्ति बन लाज बचाती हैं l
जिसे सब अबला कहते वो तो रनचंडी भवानी और दुर्गा काली है l
मत समझो कमजोर उसे उसने ही तो सृष्टि बनाई और सँवारी हैं l
युग बीते पर आज भी हर नारी में रानी लक्ष्मी बाई समायी है l
साहस त्याग बलिदान सेवा और स्वाभिमान से जिसने छवि बनाई हैं l
काजल मनीष जैन
राजस्थान