
#दिनाँक_11_06_2026
#विषय_इतिहास_के_पन्नों_से
महाभारत की वह सभा आज भी पुरुष समाज पर कालिख है l
जहां शक्तिशाली पुरुष वर्ग ने स्त्री केअपमान पर साधी चुप्पी हैं l
द्रोपदी के चीर हरण के साथ-साथ महाबलीयो के मौन ने गहरी चोट मारी हैं l
भरी सभा में स्त्री की लाज पर कुरुवंश के अधर्म का इतिहास जारी है l
स्त्री को खिलौना समझा बाँट लिया वस्तु की तरह नाम जिसका पांचाली हैं l
आयी जब उसकी रक्षा की बारी खेल में उसपर दाव लगाया हैं l
हार गए उसे,सामने अधर्मी दुर्योधन और छल करने वाला मामा शकुनी हैं l
भरी सभा ज्ञानियों और महाबलीयो की,उनका राजा और न्याय भी अंधा है l
बड़े-बड़े वीर बेठे सामने,आँखे मूँदे सामने विवश स्त्री का सम्मान है l
केश पकड लाए सभा में आँखों में आंसू की धारा,अकेली और बेबस स्त्री की लाज का सवाल है l
बेच दिया अपना पौरुष जुए के उस खेल में तोड़ दी मर्यादा द्रौपदी को दांव पर लगाया हैं l
थक गई द्रौपदी पुकारते जिसे समझा कुल का रक्षक उनके कान भी बंद है l
नजरे झुकी द्रोण की भीष्म पिता भी मौन खड़े अपने कुल का विनाश देख रहे हैं l
चीखती रही स्त्री,न्याय और मर्यादा का वहाँ हर एक धागा कच्चा हैं l
खींच रहा दुशासन द्रौपदी के परिधान भूला अपनी मर्यादा और स्त्री का सम्मान है l
रोती गिड़गिड़ाता चीखती चिल्लाती आँसू बहाती पर कोई आगे ना आया देना जिसे उसका साथ है l
थक कर पुकारा जब उसने कृष्ण को वस्त्र बढ़ गया इतना जिसका कोई अंत ना है l
थक गया दुशासन खींचते खिंचते परिधान हार गए सब जो बेठे सभा में अधर्मी है l
मौन थी जो सभा वो इतिहास को कलुषित कर गई कृष्ण ने बचा ली लाज वो जो सभा में हार गई हैं l
एसे कृष्ण की आज भी जरूरत है स्त्री की इज़्ज़त खतरे में है l
बचाने उसे कोई नहीं आता समाज मे ही छिपे कई दरिन्दे है l
कहीं स्त्री सुरक्षित नहीं आती जाती गंदी नजरो से देखी जाती है l
कई स्त्रियां अपमान सहती है अपनों की ख़ातिर अपनों से छली जाती है l
ना आते कोई कृष्ण बचाने एसे ही बेरहमी से मारी जाती हैं l
कर लो सम्मान स्त्री का वरना इतिहास फिर दोहराता है l
स्त्री पर जो हाथ डाले उसका विनाश निश्चित ही आता है l
काजल मनीष जैन
राजस्थान