
#विषय_भीगी_भीगी_एक_शाम
#स्वरचित
वो भीगी भीगी एक शाम थी आँखों में कुछ नमी थी l
बरसती बूँदों के साथ बहती यादो की झड़ी थी l
मिलने की खुशी और तेरे दीदार की आरज़ू थी l
एक बार मिलने को सालों का इंतजार बहुत बड़ा था l
हर पल भारी लगता था मानो वक्त जेसे रुक जाता था l
कुछ पल का मिलना देखना और बातो का दौर छोटा था l
मन मे खुशी होठों पर हसीं दिल बड़ा घबराता था l
पर गया वक़्त लौटने का जब मन बहुत भारी था l
बिछड़ने के ग़म और वापसी में दिल उदास था l
आँखों में बसा कर वो चेहरा वापस जाना जरूर था l
भीगी पलकों से उसे अलविदा कहना उसूल था l
बीते लम्हों को संजो कर वहां से जाना हुजूर था l
भिगा मन है फिर भी होठों से मुस्कुराना था l
तू भी उदास था इसलिए आँखों में आँसू लेकर मुस्कुराना था l
गूंजेगी याद दिल के कोने मे अब यादो का सहारा था l
आता जाता ठंडी हवा का झोंका तेरी याद दिलाता था l
काश वो वक़्त वही ठहर जाता जब तुमसे मिला था l
रही अधूरी बाते हो जाती पूरी कल किसने देखा था l
भीगी भीगी शाम जब भी आती याद वो पल आता था l
काजल मनीष जैन
राजस्थान