
दिनाँक_27_05_2026
#विषय_दहेज
#स्वरचित
बेटी भी दो और दौलत भी दो दुनिया ने कैसी ये रीत बनाई l
दहेज के दानवों ने बेटीयों की खुशियो की बोली लगाई l
पिता नें सब दिया पर लालची निगाहों को कमी नजर आई l
तिल तिल जलती तानों के तीर सहती अपना फर्ज वो निभाई l
भूखे दानवों को दया ना आयी फिर भी बेटियाँ ही जलाई l
दो कौडी के लोगों नें अपने बेटो की बोलियाँ लगाई l
क्या तुमने ये जिन्दगी ईन बेटियों के भरोसे ही पाई l
है हाथ तुम्हारे भी मेहनत करो क्या तुमने हाथो में चूडिय़ां पाई l
करो सपने अपने पूरे खुद से दूसरे के धन पर नजरे क्यूँ जमाई l
माँग कर खाना फ़ितरत तुम्हारी क्या ये जिन्दगी भिकारी सी तुमने पाई l
रहते हो ठाठ बाँट से ये शौहरत भी तुमने माँग माँग कर पाई l
एक लड़की के पिता की कमाई तुमने उनके उनकी हाय से पाई
पिता के गिरते आँसू,डरी सहमी बेटियाँ दया तुमको ना आई l
दहेज के लोभी दानवोंने विवाह के पवित्र बंधन को आग लगाई
बंद करो लेनेदेन का खेल,छोड़ो उसे सौदे की जिसने बात बढाई l
पढाओ लिखाओ बेटियों को,दिखा दो उन्हें बेटियों को जिसने बोझ जताई l
बेटियाँ है अनमोल तुमनें उनके भरोसे पाई हो पर इन्होंने तुम्हारे भरोसे जिंदगी नहीं पाईं l
काजल मनीष जैन
राजस्थान