Back to feed

जीवन

यह जीवन एक बहती धारा कभी धूप कभी ठंडी छाया है

बचपन की अल्हड किलकारी जवानी में जिम्मेदारी भारी l

बुढ़ी आँखों में अब सन्नाटे जीवन भर संघर्ष में जो काटे है l

जिंदगी में कभी है सुख के फूल तो कभी दुख के काँटे भी l

जीवन तो चलते जाना हैं राहों में चाहें मुश्किल हजार है l

क्या लेकर आए क्या लेकर जाना हैं जीवन तो आना जाना है l

जीवन की बहती धारा में बचपन से बुढ़ापा तक बहते जाना है l

मिट्टी का सुन्दर खिलौना एक दिन फिर मिट्टी में मिल जाना है l

काजल मनीष जैन

राजस्थान l

Baatcheet