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तू है तो कहीं न कहीं

#दिनाँक_02_06t_2026

#विषय_तू है तो कही न कही

"तू है तो कहीं न कही"ये एहसास मुझे होता है l

सामने नहीं पर तेरा साया हमेशा मेरे आसपास होता है l

तू दुनिया के किसी भी कोने में हो तेरा अक्स मुझमें रहता है l

फासले दोनों के दरमियाँ,मै इस जंहा तू उस जंहा में रहती है l

तारों भरी रात मे जब आसमा को देखती हूँ बस तुझे ढूँढती हूँ एसा लगता तू भी मुझे छुपकर कहीं ना कही से देखती होगी l

"तू है तो कहीं न कहीं"ये एहसास मुझे होता है l

जब कदम थकने लगे एक साया साथ महसूस होता हैं l

ढूँढे तब दिखती नहीं मुझे वो,पर हरपल साथ देती है l

बसती थी जान जिसकी हममे वो अब तस्वीर में रहती है l

हमसे दूर होने से डरती अब दूर कहीं आसमानों में बसती है l

फिर भी लगता है दूर से ही सही वो हमे देखा करती हैं l

"तू है तो कहीं न कहीं"ये एहसास मुझे होता है l

ये सिर्फ एक सोच नहीं वो तसल्ली है जो हमे टूटने नहीं देती है

जब हवा का झोंका छूता है एसा लगता गले तूने लगाया है l

जब खामोशी रहती चारो तरफ याद तेरी आने लगती है l

ढूँढते तुझे तेरे साड़ी चूडी या अलमारी में जो रखा समान है l

हर चीज़ में महसूस होती तेरा अह्सास बहुत पवित्र और खास है

"तू है तो कहीं न कहीं" ये एहसास मुझे होता है l

माना कि तुझे देख सकते नहीं पर बंद आँखों में तेरा ही चेहरा रहता है l

दुनियां की भीड़ में तेरा ही खयाल रहता हरपल मुझे तेरी कमी खलती है l

आज भी मेरी माँ तू मेरी बातों में मेरी कविताओ में मेरे दिल मे बसती है l

जहा भी है तू वहां से तू वहां से देखना यादो में हमेशा तू रहती हैं l

"तू है तो कहीं न कहीं" ये एहसास मुझे होता है l

काजल मनीष जैन

राजस्थान

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