
#विषय वो परिवार के साथ गर्मी की छुट्टियाँ
#विधा संस्मरण
वो परिवार के साथ गर्मी की छुट्टी तब गर्मी में परीक्षा खतम होते ही 2 से तीन महीनों की छुट्टियाँ रहती थी l आजकल तो 15 से 20 दिन की छुट्टी होती थोड़े दिन स्कूल होते फिर छुट्टी होती l छुट्टियों के बीच टेंशन l तब तो छुट्टी होती तो फिर लंबी ही होती l लोग नाना-नानी के यहां जाते में अपने घर मम्मी-पापा के यहां जाती थीं l क्युकी में मामा मामी के यहाँ रहती थीं lपूरे साल इंतजार रहता छुट्टियों का l मम्मी पापा से मिलने का उन्हें देखने का l बस छुट्टियाँ होते ही इंतजार कब जाए जेसे जाने का दिन निश्चित होता मन खुश हो जाता l गाँव का कच्चा घर आँगन के पैड़ ,गाय और सुकून भरा स्वच्छ वातावरण जो शहर से एकदम अलग था l
गाँव मे जाते ही पैड़ पर बंधा झुला जेसे हमारी ही राह देख रहा हो l बहुत आनंद आता झूल कर बड़ा आनंद आता l पापा साइकिल पर बिठा कर खेतों में ले जाते वहाँ पेड़ों से आम और बैर तोड़ कर खाते l मोहल्ले भर में दोड़ लगाते कंचे,सतोलिये,और भी कई खेल खेलते l मोहल्ले भर में रौनक हों जाती lकोई जिम्मेदारी ना कोई टेंशन ना कोई फ़िकर कितनी अच्छी बीतती थी छुट्टियां l आज कल तो कम छुट्टियाँ और ऊपर से इतना सारा होमवर्क दे दिया जाता कि एंजॉय के साथ दिमाग में टेंशन ज्यादा रखते है बच्चे l अब बहुत याद आतीं है वो छुट्टियाँ l वो गाँव,वो पैड वो आँगन lसब सुनें है अब l गर्मी की छुट्टियाँ तो आती है अब पर बच्चों की अपनी नहीं l
काजल मनीष जैन
राजस्थान