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दो पीढ़ियों का अन्तर

कुछ तुम लिखो कुछ हम लिखे

दिनाँक_29_05_2026

विषय-दो पीढ़ियों का अन्तर

स्वरचित

दो पीढ़ियों का अन्तर सिर्फ उम्र का फासला ही नहीं है l

सोच तकनीक और जीने के तरीके का बदलाव भी है l

वो रिश्ते निभाते मिल जुल कर रहते संयुक्त परिवार बसाते हैं l

हम हम दो हमारे दो बना कर छोटा परिवार सुखी बनाते है l

वो साथ बैठ कर तसल्ली से सबके साथ समय बिताते है l

हम निजता और आजादी के नाम अकेलापन में जीते हैं l

वो बचत करते पैसे बचा कर अपना भविष्य संवारते हैं l

हम आज में जीने के लिए क्रेडिट कार्ड का रास्ता देखते है

वो अख़बार की खबरों से उनके सवेरे की शुरुआत करते है l

हम फोन के नोटिफिकेशन से दिन की शुरुआत करते है l

बचत हैं उनका उद्देश्य आ सकता भविष्य में बहुत काम है l

हमने आज कमाया आज गंवाया कल का सोचा ना काम है l

अनुभवों की खान उनके पास फंसे जब मुसीबत में आती काम है l

हम तो थोड़े हो विपरित हालात घबराते ज्यादा सोचते कम है l

संस्कार और मर्यादा की दौलत बांटते विरासत ये आज हैं l

उनके संस्कार मान और मर्यादा ओल्ड फैशन लगती आज हैं l

आज भी सहेज रखी यादें उन्होंने पुरानी तस्वीर और डायरी मे

हम आज भटकते फोन की गैलरी और क्लाउड की फोटो में l

किताबें पढ़ना शोख उनका अखबार में देश जहान बसता है l

किताबे तो अब भूल ही जाओ रील और गेम में जीवन रमता है

दादी नानी की कहानियाँ होती मजेदार सुन लोरी निंद आती है

अब कोन सुनाए और कोन सुने फोन ने इनकी जगह लेली है l

साथ बड़ो का और उनके आशीर्वाद का हमे बहुत सहारा है l

जीवन हमारा उन्होंने ही संवारा उनके बिना ना कोई हमारा है l

दोनों के जीने के तौर तरीक़े और सलीके में बदलाव हुआ है l मुसीबत में हो अगर परिवार दोनों ने हुनर अपना दिखाया हैं l

है अन्तर दोनों पीढ़ियों में बदला उनके जीने का अंदाज है l

दिल उनका हमारे लिए धड़कता बस सोच का पैमाना बदला है

जीवन मे उनका होना ही सुख भरी छांव है l

काजल मनीष जैन

राजस्थान

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