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विरासत

दिनाँक_03_06_2026

#विषय_विरासत

#स्वरचित

वो गाँव के कच्चे मकान की मिट्टी की सोंधी खुशबु पुरखों का है वरदान l

वो सिर्फ ईंट और मिट्टी का ही घर नहीं है इसमें यादों का है बसेरा l

माता पिता की सीख का मेरी रगों में बहता सदियों का स्वाभिमान l

कहानियाँ जो दादा-दादी ने उस आँगन में सुनायी मिला भाई बहन का प्यार l

विरासत है ये बहुत अनमोल संस्कार की पूंजी यही से मुझमे है आयी l

मेरे चरित्र की नीव बने है उनके अनुभव और उनकी दी हुई सीख l

याद है मुझको पेड़ों की ठंडी छाया ओर खेतों की हरियाली का गीत l

मेरी विरासत है.मेरा घरऔर मेरा पैतृक गांवजिसकी गालियों में है मेरे मीत l

बीते हुए जीवन की हर याद सहेजुगी यही तो है मेरे जीवन की प्रीत l

पिता का अनुशासन माँ की लोरी सुलझा देती हर उलझन की डोर l

सत्य की राह पर चलाना पिता ने सिखाया चाहें कितना भी मुश्किल हो सफर l

मेहनत के दम पर तकदीर लिखना थक कर बैठ ना जाना जीवन पर होगा असर l

करुणा सिखाई माँ ने दूसरे के दुख को देख पिघलना सिखाया l

छू लो आसमान भले जमीन से जुड़े रहना अभिमान ना करना माँ ने बताया l

सिखाया मुझे हौसला रखना, प्रेम करना,अपनापन धैर्य और सेवा करना l

जब कदम डगमगाते है पिता का हौसला और माँ का धैर्य हौसला देता है l

उनके संस्कार की धरोहर व्यक्तित्व है मेरा जो मुझे प्रेरणा देते हैं l

संपति नष्ट हो सकती पर माता-पिता.के संस्कार जीवन भर रहते हैं l

नहीं चाहिए महल चौबारे उनकी सीख ही काफ़ी है खुश हो कर देते जो,उनका वो आशीष ही काफी हैं l

यह विरासत है असल में मेरी असली पहचान यहीं मेरी पूंजी इसी से मेरा मान है l

मकान वो चाहे जितना पुराना उससे जुड़ी मेरी जिन्दगी की यादें और बचपन है l

केसे कह दु खंडहर उसे उसमे मेरे माता-पिता के जीवन का गुजरा एक हिस्सा है l

सुख-दुख, धूप छांव और जीवन के उतार चढाव का दिल से जुड़ा यादो का किस्सा है l

वो घर और संस्कार की विरासत मिली मुझे वहां से जिसका बचा सिर्फ एक हिस्सा है l

काजल मनीष जैन

राजस्थान

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