मैं अपने ही संग जीवन बिताता हूँ,मुझे अपना एकांत भाता है,मुझे अपनी स्वाधीनता प्रिय है—क्योंकि मैं स्वयं से प्रेम करता हूँ।सचाइयों के संगमैं बालक-सा बैठ पाता हूँ,अपने ही साथनिर्भय पथ पर चल पाता हूँ—मैं नितांत अकेला नहीं हूँ।मैं मौन की ध्वनि को सुनता...

Kya HuaYahan apni story ka background set karo — kab hua, kahan hua, kaise shuru hua...Turning PointWoh lamha jab sab badal gaya — kya realize hua, kya feel hua...Maine Kya SeekhaIs experience se kya seekh mili — jo doosron ke kaam aa sake...Mera ...

अब तक दिल-ए-खुशफ़हम को _ _ _ !-------------------+-----------------------------मज़ाक़रात नाकाम हुए,कोई बात नहीं,ऐसा भी होता है!एक बार फिर,Once more, once again,यह अंत नहीं है राह का!कोई तो आए,कोई तो जाए,उन्हें बताए—बैठक फिर से हो,बैठक फिर से हो!!1...

हम समय के महासागर से उठते हैंऔर समय के महासागर में ही विलीन हो जाते हैं!हम कहाँ से आते हैंऔर कहाँ चले जाते हैं?यह सब एक रहस्य है!लेकिन कहानियों के प्रतीकों के माध्यम सेहम वास्तविकताओं को समझने की कोशिश करते हैं।तो, हे कथावाचक,कृपया अपनी कथा जारी र...

पचास वर्ष बीत गएस्मृतियों की पगडंडी परएक गाँव था।कुओं में पानी लबालब भरा रहता,और हाथ से बनी रस्सी के सहारे निकाला जाता।पीने का पानीमिट्टी के घड़ों में संजोया जाता था।बारिशें खूब होती थीं,आसमान इतना सूना नहीं था।गलियाँ बाँहें फैलाए रहतीं,बैलगाड़िया...

अंतिम भ्रममैं अंतिम भ्रम के बारे में सोचता हूँ,अंतिम मूर्ति के बारे में।जब तुम मूर्तियों, छवियों और आदर्शों से परिचित हो जाते हो,वे तुम्हें तोड़ते हैं या तुम उन्हें तोड़ते हो —यह एक ही बात है।पर यदि तुम इस कार्य पर आगे बढ़ते हो,तो हथौड़ा साथ रखना ...

I befriend with satansAn angel looks mestraight in my eyesi pretend as i don' see himi am busy with satansBut howlong?!In the endwill return to angelfor an everlasting relationSooner or laterBut i am sure !Rukhsar Ahmad Farooqui Excerpt from autho...

Let us dancein this full moon lightwhere are you my darling?Come out from my imaginationif you cani will sing my swan songand dance the lastand will like to burn in my own innere fireBut first darling come outi am waiting to dance in moon light !R...

इसी वर्ष, अस्सी वर्षों से अधिक समय की प्रभुता के बाद “नई दुनिया” एक बीता हुआ स्वप्न बनती हुई प्रतीत हो रही है। पता नहीं Christopher Columbus अपनी कब्र में क्या सोच रहे होंगे।अंकल सैम की टोपी अब जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है। उनका टेलकोट जगह-जगह से घिस गय...

آداب عرضیہ رہی آپ کی تحریر کا ادبی / شاعرانہ ہندی ترجمہ:जाओ, तुम भी सो जाओजाओ, तुम भी सो जाओअपनी क़ब्र मेंया किसी दूसरी टूटी-फूटी, जो भी नज़र आए —कब्रिस्तान में जगह की कोई कमी तो नहीं!बात तो एक ही है —ज़िंदों के मक़बरे हों या मुर्दों की बस्ती,बात ...

"जन्नत के फल दोज़ख की गर्मी से पकते हैं।"— शैख़ अकबर इब्न अरबीऔर अगर यह कहा जाए कि—"जन्नत का रास्ता दोज़ख के बीच से होकर गुज़रता है",और यह भी कहा जा सकता है कि—"दोज़ख के रास्ते में नेक इरादे बिखरे पड़े हैं!"तो ये दोनों बातें भी सही हो सकती हैं।लेक...

अब तो मानो संवाद भी एक व्यवसाय बन चला है—किसी से कहना, किसी को सुनना,जीवन-निर्वाह का एक साधन!सुना था कि लंदन में भारतीय विद्यार्थीवृद्धों को पुस्तकें सुनाकर,उनके क्षणों को सहलाकर,कुछ धन अर्जित कर लिया करते थे।आज एकांतएक वैश्विक व्यथा बनकर उभर आया ...

Johann Wolfgang von Goethe ने लिखा:"हम पेरोल पर छोड़े गए क़ैदी हैं। ललित कलाओं के माध्यम से ही इसका आनंद लिया जा सकता है।"रात का लंबा-चौड़ा समंदरकिश्तियों के मुसाफ़िरसुबह कब होगी?कहानियाँ सुनाई जाएँ, कहानियाँ सुनाई जाएँ!साहिल आएलंगर डालेंघर जाएँLo...

यद्यपि यह बहार (बसंत) का मौसम है। पेड़ों पर कोंपलें निकल रही हैं और नई पत्तियाँ आँखों को सुकून दे रही हैं—लेकिन मौसम भी तेज़ी से बदलाव की ओर बढ़ रहा है। फिर भी यह सब जिस तरह धीरे-धीरे होता है:उठेंगे परदे बाम-ओ-दर आहिस्ता-आहिस्ताफ़ितरत आहिस्ता-ख़रा...

जब तक कहानी सुनने की उम्र तक पहुँचा, नानी और दादी दोनों इस दुनिया से रुख़्सत हो चुकी थीं। सुना है कि जब इंसान बुढ़ापे की सरहदों को छूने लगता है, तो वह अपने माता-पिता की सांस्कृतिक गोद में पनाह लेना चाहता है। एक उम्र पर पहुँचकर इंसान तमाम अनुभवों स...
