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विचार

विचार हमारे मन में कहाँ से आते हैं?

सारे ज्ञानी पुरुष अपनी कब्रों में सो चुके हैं।

कौन बताएगा?

उनके शब्द अब भी उद्घाटित होने की प्रतीक्षा में हैं,

पर कुंजी कहाँ है?

कुंजी एक स्वर्णिम संदूक में बंद है,

जो किसी दूरस्थ रेगिस्तान में दफ़्न है।

आओ, हम उस लंबी यात्रा पर निकल पड़ें,

अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि

रेगिस्तान स्वयं समुद्र में विलीन हो जाए!

...रुखसार अहमद फारुकी

27 अक्टूबर 2015

बैंगलोर।

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