
मैं अपने ही संग जीवन बिताता हूँ,
मुझे अपना एकांत भाता है,
मुझे अपनी स्वाधीनता प्रिय है—
क्योंकि मैं स्वयं से प्रेम करता हूँ।
सचाइयों के संग
मैं बालक-सा बैठ पाता हूँ,
अपने ही साथ
निर्भय पथ पर चल पाता हूँ—
मैं नितांत अकेला नहीं हूँ।
मैं मौन की ध्वनि को सुनता हूँ,
और अतुकांत लयों पर
मंद-मंद नृत्य करता हूँ।
क्योंकि मौन स्वयं वाचाल है,
और मेरे चारों ओर
एक ब्रह्मांडीय नृत्य प्रवाहित है—
जिसमें मैं भी
अपने अस्तित्व को विलीन कर देता हूँ।
……
रुखसार अहमद फारुकी
17/04/2026 .