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रात का सफ़र

Johann Wolfgang von Goethe ने लिखा:

"हम पेरोल पर छोड़े गए क़ैदी हैं। ललित कलाओं के माध्यम से ही इसका आनंद लिया जा सकता है।"

रात का लंबा-चौड़ा समंदर

किश्तियों के मुसाफ़िर

सुबह कब होगी?

कहानियाँ सुनाई जाएँ, कहानियाँ सुनाई जाएँ!

साहिल आए

लंगर डालें

घर जाएँ

Lord Byron ने कहा:

"जब मौसमों का सफ़र ख़त्म हो जाए,

तो घर लौट चलें।"

घर कहाँ है?

घर एक कल्पना है

एक सपना है

हर निर्वासित का!

तो रात के समंदर में

किश्ती के पतवार संभालें!!

आदर सहित

रुख़सार अहमद फ़ारूक़ी

(गोंती वाला)

29/03/2026

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