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PRIYA TIWARI

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Personal Story

बिछड़ते रिश्ते

मैंने जाते-जाते जाना... कौन है अपना, कौन परायामैंने जाते-जाते जाना...रिश्तों का हिसाबखून से नहीं,ज़रूरतों की स्याही से लिखा जाता है।जिन हथेलियों कोमैंने अपनी दुनिया समझा था,वहीं हथेलियाँमेरी उँगलियाँ छोड़करभीड़ में खो गईं।और जो अजनबी थे,जिनसे कभीन...

PRIYA TIWARI
2m read400
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अधूरी कहानी — "तीसरी खिड़की"

रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे थे। पहाड़ों के बीच बसे छोटे से गाँव "बेलाघाट" में सन्नाटा ऐसा था कि हवा की सरसराहट भी साफ सुनाई देती थी।नवीन, जो पेशे से फोटोग्राफर था, अपने दादा की पुरानी हवेली में कुछ दिनों के लिए रहने आया था। हवेली बहुत बड़ी थी, ले...

PRIYA TIWARI
2m read510
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हार मत मानो

जब राहों में काँटे होंगे,और कदम-कदम पर अँधियारे,जब अपने भी साथ छोड़ दें,और लगें सभी नज़ारे हारे।तब याद रखना एक बात,सूरज भी हर शाम ढलता है,पर अगली ही सुबह नया होकर,फिर पूरे आकाश में जलता है।गिरना कोई हार नहीं है,रुक जाना ही हार कहलाता है,जो ठोकर खा...

PRIYA TIWARI
1m read630
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फलसफा

यूँ तो नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,यूँ तो नहीं कि आँखें नम ही नहीं।हर मुस्कान के पीछे कुछ राज़ छिपे हैं,हर ख़ामोशी में एहसास कम ही नहीं।ज़िंदगी सिलसिला आज-कल का नहीं,ज़िंदगी फ़लसफ़ा दो पल का नहीं।जो ठोकरों से सीखकर आगे बढ़े,उसके लिए कोई रास्ता मुश्किल...

PRIYA TIWARI
1m read611
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प्यार की कोई परिभाषा नहीं

जो रूह से रूह तक उतर जाए, वही प्यार होता है।जो बिना पाए भी पा लिया जाए, वही प्यार होता है।प्यार की कोई सीमा नहीं होती,प्यार तो हर सीमा से परे होता है।सच्चे प्यार में पाने की शर्त नहीं रखनी चाहिए,बल्कि यह सोचना चाहिए कि हम अपने प्रिय को क्या दे सकत...

PRIYA TIWARI
1m read661
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शायरी

हमसे इतना भी दिल न लगाइए,कि हमारे न रहने का आपको ग़म हो।हम तो बारिश की उस बूंद की तरह हैं,जो ज़मीन को छूकर कहीं खो जाती है।क्या कहें अपने अकेलेपन का आलम,अब तो किसी के साथ से भी खौफ़ लगता है।कल तक जिन्हें अपना हमसाया समझते थे,आज उनके साये से भी डर ...

PRIYA TIWARI
1m read690
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जज्बात

"कुछ रिश्ते किताबों जैसे होते हैं,हर पन्ने पर एक नया एहसास होता है।जो लोग दिल में बस जाते हैं,उनसे दूर होकर भी उनका साथ होता है।वक्त बदल जाए तो बदल जाए दुनिया सारी,पर सच्ची मोहब्बत का अंदाज़ नहीं बदलता।जो एक बार दिल में उतर जाए,वो फिर कभी यादों से...

PRIYA TIWARI
1m read690
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जब मैंने किसी की मदद की और खुद को बदला हुआ पाया

राहुल एक साधारण कॉलेज छात्र था। वह पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह हमेशा सिर्फ अपने बारे में सोचता था। उसे लगता था कि दुनिया में हर व्यक्ति को अपनी समस्याएँ खुद ही सुलझानी चाहिए। इसलिए वह किसी की मदद करने से अक्सर बचता था।एक दिन सर्दिय...

PRIYA TIWARI
2m read700
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आगे बढ़ते रहो

राह कठिन हो, पथरीली हो,या मंज़िल बहुत दूर लगे,हिम्मत का दीपक जलाए रखना,चाहे हर सपना चूर लगे।ठोकर लगना हार नहीं है,गिरकर फिर उठ जाना सीखो,आँधियों से डरकर रुकना क्या,उनसे लड़कर मुस्काना सीखो।किस्मत भी झुक जाती है अक्सर,उनके आगे जो चलते हैं,अंधेरों क...

PRIYA TIWARI
1m read730
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एक छोटी चीज जो मुझे रोज खुश करती है

आर्या की ज़िंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखती थी। नौकरी, घर, ज़िम्मेदारियाँ और रोज़ की भागदौड़। लेकिन उसके भीतर एक खालीपन था। उसे लगता था कि खुशी शायद किसी बड़ी उपलब्धि में छिपी है—अच्छी नौकरी, बड़ा घर या बहुत सारे पैसे।हर सुबह वह जल्दी उठती, काम...

PRIYA TIWARI
1m read700
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अधूरी दुआ

रिया अपने बूढ़े पिता की इकलौती बेटी थी। उसकी माँ बचपन में ही गुजर गई थीं, इसलिए पिता ने ही माँ और पिता दोनों का प्यार दिया था। रिया का सपना था कि वह नौकरी करके अपने पिता को हर खुशी दे।कई संघर्षों के बाद उसे एक अच्छी नौकरी मिल गई। पहली तनख्वाह मिलन...

PRIYA TIWARI
1m read700
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इन्तजार

इंतज़ार है एक पल के गुज़र जाने का,इंतज़ार है एक पल के ठहर जाने का।इंतज़ार है तुम तक आने का,इंतज़ार है तुमसे दूर जाने का।इंतज़ार है फिर से ख़ुद को पाने का,इंतज़ार है ख़ुद को खो देने का।इंतज़ार है उस सुबह का,जो नई उम्मीदें लेकर आए,और इंतज़ार है उस र...

PRIYA TIWARI
1m read640
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मेरी पहली नौकरी- कलम से बनी पहचान

गाँव की एक साधारण लड़की थी जिया। उसे बचपन से कहानियाँ लिखने का शौक था। जब भी उसे समय मिलता, वह अपनी कॉपी में कुछ न कुछ लिखती रहती। लोग अक्सर कहते,"कहानियाँ लिखने से क्या होगा? इससे कोई नौकरी थोड़ी मिलती है!"जिया मुस्कुरा देती, लेकिन उसके दिल में ए...

PRIYA TIWARI
2m read710
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हवेली का आखिरी दरवाजा

रात के ठीक बारह बजे थे।तेज़ बारिश हो रही थी। बिजली की चमक आसमान को चीर रही थी। एक सुनसान सड़क पर एक कार तेजी से दौड़ रही थी।कार में चार दोस्त बैठे थे—आरव, निशा, करण और सिया।वे लोग छुट्टियाँ मनाने के लिए पहाड़ों की तरफ जा रहे थे।अचानक...धड़ाम!कार क...

PRIYA TIWARI
3m read940
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सफर

चलते जाना ये मेरा कैसा सफ़र है...ना कोई मंज़िल, ना कोई राहगीर संग है...जिसे सोचा अपना बनाऊँ,उसने कहीं ना कहीं मुझे कमज़ोर समझा...ये उन मतलबी लोगों को क्या बताऊँ,मुझे सहारा नहीं, साथ चाहिए था...थक कर भी मुस्कुराते रहे हम,क्योंकि आँसुओं का भी अपना ए...

PRIYA TIWARI
1m read710
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उम्मीद का आखिरी धागा

नैना हमेशा से प्यार की भूखी थी। वह कोई महल या दौलत नहीं चाहती थी, बस इतना चाहती थी कि कोई उसे अपना कहे। लेकिन ज़िंदगी ने उसे हर मोड़ पर ठुकराया।बचपन में पिता ने उसे बोझ समझा, रिश्तेदारों ने उसकी मजबूरियों का मज़ाक उड़ाया और जिन दोस्तों को वह अपना ...

PRIYA TIWARI
2m read820