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हवेली का आखिरी दरवाजा

रात के ठीक बारह बजे थे।

तेज़ बारिश हो रही थी। बिजली की चमक आसमान को चीर रही थी। एक सुनसान सड़क पर एक कार तेजी से दौड़ रही थी।

कार में चार दोस्त बैठे थे—आरव, निशा, करण और सिया।

वे लोग छुट्टियाँ मनाने के लिए पहाड़ों की तरफ जा रहे थे।

अचानक...

धड़ाम!

कार के सामने कोई सफेद साया आ गया।

आरव ने घबराकर ब्रेक लगाया।

कार सड़क के किनारे जाकर रुक गई।

"ये क्या था?" सिया डरते हुए बोली।

सभी ने बाहर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था।

"शायद कोई जानवर होगा," करण बोला।

लेकिन तभी निशा ने कांपती आवाज में कहा—

"जानवर के पैरों के निशान उल्टे नहीं होते..."

सभी की नजर मिट्टी पर पड़ी।

बारिश में साफ दिखाई दे रहे थे...

उल्टे पैरों के निशान।

चारों के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

तभी दूर पहाड़ी पर एक पुरानी हवेली दिखाई दी।

बारिश बढ़ती जा रही थी।

उन्होंने रात वहीं बिताने का फैसला किया।

हवेली का रहस्य

हवेली के बड़े-बड़े दरवाजे जंग खा चुके थे।

जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला—

क्रीईईईईक...

अंदर अंधेरा था।

लेकिन हैरानी की बात ये थी कि हवेली सालों पुरानी लग रही थी, फिर भी अंदर धूल बिल्कुल नहीं थी।

जैसे कोई अभी भी वहां रहता हो।

दीवारों पर अजीब तस्वीरें टंगी थीं।

एक तस्वीर पर निशा की नजर पड़ी।

उसे देखकर उसका चेहरा पीला पड़ गया।

"ये... ये कैसे हो सकता है?"

सबने तस्वीर देखी।

उस तस्वीर में चार लोग खड़े थे...

और वे चारों बिल्कुल आरव, निशा, करण और सिया जैसे दिख रहे थे।

तस्वीर के नीचे तारीख लिखी थी—

17 जुलाई 1986

यानि चालीस साल पुरानी।

"ये मजाक किसने किया है?" करण चिल्लाया।

लेकिन किसी के पास जवाब नहीं था।

आधी रात की दस्तक

रात के दो बजे।

सब अलग-अलग कमरों में सो रहे थे।

तभी...

ठक... ठक... ठक...

निशा की नींद खुल गई।

किसी ने दरवाजा खटखटाया था।

"कौन है?"

कोई जवाब नहीं।

फिर आवाज आई—

"दरवाजा मत खोलना..."

निशा सन्न रह गई।

आवाज उसकी अपनी थी।

ठीक उसी की।

वह डरते हुए दरवाजे के पास गई।

लेकिन उत्सुकता के कारण उसने दरवाजा खोल दिया।

बाहर कोई नहीं था।

सिर्फ लंबा अंधेरा गलियारा।

और गलियारे के अंत में...

एक लड़की खड़ी थी।

सफेद कपड़ों में।

लंबे काले बाल।

चेहरा नीचे झुका हुआ।

निशा चिल्लाते हुए पीछे हट गई।

तभी वह लड़की धीरे-धीरे सिर उठाने लगी।

लेकिन उसका चेहरा नहीं था।

वहां सिर्फ काला खाली गड्ढा था।

हवेली का बंद कमरा

सुबह होने पर चारों ने फैसला किया कि तुरंत यहां से निकल जाएंगे।

लेकिन जब वे बाहर जाने लगे—

मुख्य दरवाजा गायब था।

जहां दरवाजा था वहां अब सिर्फ दीवार थी।

सभी के होश उड़ गए।

घबराकर वे हवेली में रास्ता ढूंढने लगे।

तभी सिया को एक कमरा मिला।

कमरे पर लिखा था—

"आख़िरी दरवाज़ा मत खोलना"

कमरे के बाहर कई अजीब निशान बने हुए थे।

ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसे बंद रखने की कोशिश की हो।

लेकिन इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी होती है—

जिज्ञासा।

करण ने दरवाजा खोल दिया।

मौत का खेल

दरवाजा खुलते ही कमरे से ठंडी हवा निकली।

कमरे के बीचोंबीच एक पुराना आईना रखा था।

आईने में सबकी परछाइयां दिख रही थीं।

लेकिन...

एक परछाई ज्यादा थी।

पांचवीं परछाई।

जबकि कमरे में चार लोग ही थे।

धीरे-धीरे वह पांचवीं परछाई आईने से बाहर निकलने लगी।

उसका चेहरा विकृत था।

आंखें पूरी तरह काली।

होंठों पर भयानक मुस्कान।

सिया चीख उठी।

"भागो!"

चारों दौड़ने लगे।

लेकिन हवेली का नक्शा बदलने लगा।

सीढ़ियां गायब हो रही थीं।

कमरे बदल रहे थे।

गलियारे लंबे होते जा रहे थे।

जैसे हवेली जीवित हो।

असली सच

भागते-भागते वे एक तहखाने में पहुंचे।

वहां पुरानी डायरी रखी थी।

डायरी पढ़कर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

डायरी में लिखा था—

"इस हवेली में जो भी आता है, वह कभी बाहर नहीं जाता।"

"हवेली लोगों की आत्माएं चुरा लेती है।"

"और फिर उनकी जगह उनके जैसे दिखने वाले साये दुनिया में भेज देती है..."

आखिरी पन्ने पर लिखा था—

"अगर तुम ये पढ़ रहे हो, तो समझ लो कि तुम पहले ही मर चुके हो..."

सभी के चेहरे सफेद पड़ गए।

तभी उन्हें याद आया...

कल रात कार का एक्सीडेंट हुआ था।

ब्रेक लगाते समय कार खाई की तरफ फिसल गई थी।

उसके बाद क्या हुआ...

उन्हें कुछ याद नहीं था।

आख़िरी सच्चाई

वे भागकर हवेली के बाहर पहुंचे।

इस बार दरवाजा मौजूद था।

बाहर निकलते ही उन्होंने नीचे घाटी में देखा।

एक टूटी हुई कार पड़ी थी।

चार लाशें भी थीं।

आरव...

निशा...

करण...

और सिया।

सभी समझ गए।

वे जिंदा नहीं थे।

वे अपनी ही आत्माएं थे।

तभी पीछे से वही भयानक आवाज आई—

"अब तुम्हारी जगह नए लोग आएंगे..."

उन्होंने पलटकर देखा।

पूरी हवेली हजारों चेहरों से भरी हुई थी।

उन चेहरों में उनका चेहरा भी शामिल हो चुका था।

अचानक हवेली का दरवाजा बंद हो गया।

हमेशा के लिए।

और आज भी...

कहा जाता है कि बारिश वाली रातों में उस पहाड़ी पर एक पुरानी हवेली दिखाई देती है।

जहां चार दोस्त खिड़की से बाहर झांकते नजर आते हैं...

और किसी नए मेहमान का इंतजार करते हैं।

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