
जब राहों में काँटे होंगे,
और कदम-कदम पर अँधियारे,
जब अपने भी साथ छोड़ दें,
और लगें सभी नज़ारे हारे।
तब याद रखना एक बात,
सूरज भी हर शाम ढलता है,
पर अगली ही सुबह नया होकर,
फिर पूरे आकाश में जलता है।
गिरना कोई हार नहीं है,
रुक जाना ही हार कहलाता है,
जो ठोकर खाकर उठ जाता है,
वही इतिहास बनाता है।
नदियाँ भी चट्टानों से टकराकर,
अपना रास्ता बनाती हैं,
कभी नहीं पूछती मंज़िल से,
बस आगे बढ़ती जाती हैं।
यदि सपनों की कीमत चुकानी है,
तो मेहनत को अपना साथी बनाओ,
किस्मत की राह न देखा करो,
खुद अपनी तकदीर लिख जाओ।
आँधियाँ जितनी तेज़ चलेंगी,
दीपक उतना ही चमकेगा,
संघर्षों की तपती भट्टी में,
इंसान सोने-सा दमकेगा।
मत सोचो कि तुम अकेले हो,
हर विजेता ने दर्द सहा है,
जिसे आज दुनिया सलाम करती है,
उसने भी कल संघर्ष किया है।
अपने भीतर की शक्ति को पहचानो,
डर की जंजीरों को तोड़ दो,
जो कहते हैं तुम नहीं कर सकते,
उनकी सोच को पीछे छोड़ दो।
मंज़िल उन्हीं को मिलती है,
जो थककर भी चलते रहते हैं,
और सपनों की ऊँची उड़ानों में,
विश्वास के पंख भरते हैं।
इसलिए उठो, जागो, आगे बढ़ो,
समय तुम्हें पुकार रहा है,
तुम्हारे भीतर छिपा हुआ विजेता,
बस एक अवसर की राह देख रहा है।