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Kalash

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Personal Story

इश्क़ नहीं, बस एक वहम...

तुमसे बात होती है तो अच्छा लगता है,फिर ये जानना कि कुछ भी मेरा नहीं — अच्छा लगता है।मैंने ख़ुद को समझाया है सौ बार मगर,तेरी आदत छोड़ना भी कब — अच्छा लगता है।इश्क़ नहीं है, बस एक वहम बचा है शायद,मगर इस वहम में जी लेना — अच्छा लगता है।तेरी मौजूदगी स...

Kalash
1m read190
Life Lessons

अय्यारी अच्छी नहीं

जमीं पर रह के बादलों से यारी अच्छी नहीं,हदों में रह, ये बे-वजह की उधारी अच्छी नहीं​वो जिसके पाँव के नीचे, ज़मीन भी नहीं अपनी,उसे ये शहंशाहों सी, खुमारी अच्छी नहीं।​बड़ी मंज़िल के राही हो, तो पैरों पर नज़र रखना 'कलश',कि 'तुम और मैं' समझ लें अब, ये ...

Kalash
1m read321
Relationships

📍अधूरा पन्ना

आर्यन और मीरा कॉलेज के दिनों से साथ थे। आर्यन एक लेखक बनना चाहता था, जबकि मीरा का सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ करना था। दोनों का इश्क गहरा था, लेकिन जैसे-जैसे फाइनल ईयर करीब आया, भविष्य की चिंताएं दीवारों की तरह बीच में खड़ी होने लग...

Kalash
2m read231
Personal Story

मिलूँगा खुद से ...

बड़ी मुश्किल से फुर्सत के कुछ लम्हे चुराऊंगा मैं,भीड़ से निकलकर, पहले घर की तरफ आऊंगा मैं।​बाहर के शोर ने तो बस मेरा नाम पुकारा है,अंदर जो सन्नाटा है, उसे गले लगाऊंगा मैं।​कितना बदला हूँ, और कितना बाकी हूँ अब तक,हिसाब पुराना है, बैठ कर सुलझाऊंगा म...

Kalash
1m read241
Personal Story

एक अनकही #2

शहर की भीड़भाड़ से दूर, पुराने रेलवे क्वार्टर के आखिरी छोर पर एक छोटा सा घर था, जिसकी बालकनी में हर शाम एक बूढ़ी लालटेन जलती थी। वहां रहने वाले प्रोफेसर साहब और उनकी खामोशी, पूरे मोहल्ले में मशहूर थी।​प्रोफेसर साहब के पास किताबों का ढेर था, लेकिन उनक...

Kalash
2m read281
Personal Story

व्यर्थ

दिया बुझाने का कोई फायदा नहीं,जब रात ही भीतर उतर आई हो।साये भी अब साथ छोड़ने लगे हैं,जब मन में ही गहरी तन्हाई हो।​बाहर की हवाओं से क्या लड़ना,जब आग सुलगती हो सीने में।मिट्टी का घरौंदा तो बना लिया,पर हुनर न आया यहाँ जीने में।​तुम तेल और बाती को क्यों...

Kalash
1m read331
Life Lessons

मुलाक़ात

बड़ी मुश्किल से फुर्सत के कुछ लम्हे चुराऊंगा मैं,भीड़ से निकलकर, पहले घर की तरफ आऊंगा मैं।​बाहर के शोर ने तो बस मेरा नाम पुकारा है,अंदर जो सन्नाटा है, उसे गले लगाऊंगा मैं।​कितना बदला हूँ, और कितना बाकी हूँ अब तक,हिसाब पुराना है, बैठ कर सुलझाऊंगा म...

Kalash
1m read491
Personal Story

एक अनकही #1

​मनकापुर का वह लड़का, जिसे लोग अब सिर्फ एक 'साया' कहते थे, हर रोज़ शाम की पैसेंजर ट्रेन पकड़कर अयोध्या आता। उसके पास पहनने को ढंग के कपड़े नहीं थे, पर उसकी मुट्ठी में हमेशा एक मुरझाया हुआ कनैल का फूल होता था—वही फूल जो वैदेही को बेहद पसंद था।​वैदेही...

Kalash
2m read501
Personal Story

सफलता

हम अक्सर जीत को सफलता मानते हैं, लेकिन असली सफल इंसान वह है जो 'हार' को गले लगाना सीख जाए। अगर किसी दिन आपकी कलम न चले, या कोई परीक्षा वैसी न जाए जैसी आपने सोची थी, तो उस दिन निराश न होकर खुद को यह कहना कि "कोई बात नहीं, मैं फिर से कोशिश करूँगा"—य...

Kalash
1m read431
Personal Story

अकेले रहके जो सीखा वो क्राउड में नहीं सीख पाता

भीड़ में हम एक 'नकाब' पहनकर चलते हैं ताकि दुनिया को खुश कर सकें। लेकिन अकेले में वह नकाब गिर जाता है। अकेले रहकर इंसान अपनी कमजोरियों को पहचानता है और उन्हें स्वीकार करना सीखता है। यह वह दौर है जहाँ आप अपनी ताकत को बिना किसी की वाह-वाही के महसूस क...

Kalash
1m read521
Personal Story

हिसाब

एक रात इक बात लिखूँगा,तमाम उम्र का सारा हिसाब लिखूँगा।​जो कह न सका कभी महफ़िल में मैं,वो अनकहा सा कोई ख़्वाब लिखूँगा।​मेरे लफ़्ज़ों में होगी ज़िक्र तेरी वफ़ा का,और अपनी खामोशियों का जवाब लिखूँगा।​पन्ने गवाह होंगे मेरे हर उस दर्द के,जो छुपा रखा है,...

Kalash
1m read481