हम अक्सर जीत को सफलता मानते हैं, लेकिन असली सफल इंसान वह है जो 'हार' को गले लगाना सीख जाए। अगर किसी दिन आपकी कलम न चले, या कोई परीक्षा वैसी न जाए जैसी आपने सोची थी, तो उस दिन निराश न होकर खुद को यह कहना कि "कोई बात नहीं, मैं फिर से कोशिश करूँगा"—य...

भीड़ में हम एक 'नकाब' पहनकर चलते हैं ताकि दुनिया को खुश कर सकें। लेकिन अकेले में वह नकाब गिर जाता है। अकेले रहकर इंसान अपनी कमजोरियों को पहचानता है और उन्हें स्वीकार करना सीखता है। यह वह दौर है जहाँ आप अपनी ताकत को बिना किसी की वाह-वाही के महसूस क...

एक रात इक बात लिखूँगा,तमाम उम्र का सारा हिसाब लिखूँगा।जो कह न सका कभी महफ़िल में मैं,वो अनकहा सा कोई ख़्वाब लिखूँगा।मेरे लफ़्ज़ों में होगी ज़िक्र तेरी वफ़ा का,और अपनी खामोशियों का जवाब लिखूँगा।पन्ने गवाह होंगे मेरे हर उस दर्द के,जो छुपा रखा है,...
