
तुमसे बात होती है तो अच्छा लगता है,
फिर ये जानना कि कुछ भी मेरा नहीं — अच्छा लगता है।
मैंने ख़ुद को समझाया है सौ बार मगर,
तेरी आदत छोड़ना भी कब — अच्छा लगता है।
इश्क़ नहीं है, बस एक वहम बचा है शायद,
मगर इस वहम में जी लेना — अच्छा लगता है।
तेरी मौजूदगी से कुछ नहीं बदलता,
फिर भी तेरा यूँ सामने होना — अच्छा लगता है।
लोग कहते हैं “उम्मीद मत रख”, रखता भी नहीं,
बस यूँ ही टूटते रहना — अच्छा लगता है।
दिल जानता है कि ये रास्ता कहीं नहीं जाता,
फिर भी हर रोज़ उसी मोड़ पर आना — अच्छा लगता है।
✍🏻कलश