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अय्यारी अच्छी नहीं

जमीं पर रह के बादलों से यारी अच्छी नहीं,

हदों में रह, ये बे-वजह की उधारी अच्छी नहीं​वो जिसके पाँव के नीचे, ज़मीन भी नहीं अपनी,

उसे ये शहंशाहों सी, खुमारी अच्छी नहीं।

​बड़ी मंज़िल के राही हो, तो पैरों पर नज़र रखना 'कलश',

कि 'तुम और मैं' समझ लें अब, ये अय्यारी अच्छी नहीं।।

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