ज्ञान और विवेक दोनों का संतुलन और समन्वय नितांत आवश्यक है, वरना जो ज्ञान आपको लोकप्रिय और प्रसिद्ध करता है या सृष्टि को हितकारी एवं सृजनात्मक दिशा देता है, वही ज्ञान इंसान की दशा खराब कर देता है और विध्वंसक भी साबित होता है।और यदि ऐसा न भी हो, तब ...

पिछले कुछ दिनों के अनुभव ने यह सिखाया कि जीवन में उत्साह तभी आता है, जब कुछ क्रियात्मक या सृजनात्मक किया जाए। वरना ज़िंदगी सिर्फ गुज़र जाती है और होश तब आता है, जब तमाशा ख़त्म हो जाता है। फिर सिवाय पछतावे के कुछ शेष नहीं रहता।इंसान की न जाने कौन-स...

मेहनत और ईमानदारी से किए गए कार्य को जब समर्थन या सराहना नहीं मिलती है तो बहुत आश्चर्य होता है कि क्या संसार में सफलता के मानक शत- प्रतिशत बदल गए हैं ?? क्या संतों, महात्माओं की वाणी प्रभावहीन हो गई है और क्या वास्तव में आदर्श केवल किताबों में ही ...

जीवन में संयम और नियम दो महत्वपूर्ण गुण हैं ; जो साधना से मिलते हैं। निरंतर कष्ट और यातना से ही इनको साधा जा सकता है। यूं तो वैराग्य से यह दोनों सरलता से व्यक्ति का आचरण बन सकते हैं मगर लोगों के समीप,,रिश्तों के मध्य इन को साधना अत्यंत दुष्कर है। ...

हर व्यक्ति अपने विचार को अभिव्यक करने और उसको शब्दों में ढाल लेने का हुनर जानता है यानी हर व्यक्ति में एक लेखक और कवि अंश विद्यमान रहता है मगर परवान नहीं चढ़ पाता । ऐसा न हो पाने का कोई बड़ा कारण नहीं है। गहन अवलोकन किया जाए तो इसमें केवल व्यक्ति ...