
इन दिनों अध्ययन में है यह किताब ; जिसने अपनी सरलता से मन मोह लिया है। कहानी में कुछ नया और असाधारण कुछ नहीं घटता मगर जो साधारण है वही तो कथा का अविस्मरणीय पहलू है।आज जब हर कहानी अपने विशेष और विभिन्न होने को लेकर सबको आकर्षित करना चाहती है ऐसे में इसका सरल सामान्य होना चौंकाती भी है और अपना भी बनाती है। संवाद में नायक और नायिका के मध्य बातचीत कहे गए से अधिक अनकहा हृदय में जगह बनाता है। दीवार की खिड़की एक ताज़ा हवा के झोंके की तरह अंतर तक शीतल कर जाती है। इस खिड़की के पार जीवन इतना सुंदर, स्नेहिल और स्वप्निल है कि मन पुलकित होकर यही इच्छा करता है कि नायक ,नायिका दोनों इस खिड़की से वापस न हों। अंत में बात हाथी की उपस्थिति की ; उसकी छवि और उसका होना भी सहज लगता है।
@अर्शिया अंजुम