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Er. Rajan Soni

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Personal Story

मै हार जाऊं कैसे

मैं हार जाऊँ कैसे, किसी का एहसान बाकी है,मैं भाग जाऊँ कैसे, किसी का अभिमान बाकी है।अभी तो माँ की आँखों में, मुझे उम्मीद दिखती है,अभी तो बाप के सपनों का, थोड़ा मान बाकी है।गिरा हूँ, टूटकर भी मैं, मगर बिखरा नहीं अब तक,मेरे सीने में लड़ने का, अभी अरम...

Er. Rajan Soni
1m read300
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कुछ कहानी है अधूरी

कुछ कहानी है अधूरी,जो अभी होनी है पूरी,फिर भी मैं अभी रुका तो हूँ नहीं!राह में काँटे बहुत हैं,हौसले मेरे अडिग हैं,गिर गया हूँ—पर अभी टूटा तो हूँ नहीं!!मुश्किलों ने लाख रोका,वक़्त ने हर बार टोका,फिर भी कदमों को मैं अपने रोकता तो हूँ नहीं।आँधियाँ चा...

Er. Rajan Soni
1m read260
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पीलापन

चलो उठो अब हरियाली लाओ,छोड़ो मन का पीलापन।चलो उठो अब मधुर राग सुनाओ,छोड़ो मन का ढीलापन।चलो उठो अब हर्षित हो जाओ,छोड़ो मन का अनर्थ उमंग।चलो उठो अब जी भर के मुस्काओ,छोड़ो मन का अल्हड़पन।चलो उठो अब नभ को देखो ,छोड़ो मन का पीलापन।।इंजीनियर राजन सोनी अ...

Er. Rajan Soni
1m read8611
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तन्हा कर गए

एक ही गलती दुबारा कर गए,फिर से वो मुझसे किनारा कर गए,जिस राह पर साथ चलने का वादा था ,उसी राह पर हमें तन्हा कर गए।।अकेले मुझको छोड़ गए बंधन सारा तोड़ गए वापस न आए फिर से मुझसे मुख अपना मोड़ गए।।इंजीनियर राजन सोनीअम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

Er. Rajan Soni
1m read860
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सुनो तुम प्रिये

तोड़ दो सारे बंधन सुनो तुम प्रिये,छोड़ दो सारे क्रंदन सुनो तुम प्रिये।अब न रोको हृदय की उमड़ती लहर,खोल दो मन के स्पंदन सुनो तुम प्रिये।प्रेम की राह में जो भी दीवार है,आज कर दो वह खंडन सुनो तुम प्रिये।मैं तुम्हारा रहूँ, तुम हमारी रहो,बस यही है निवे...

Er. Rajan Soni
1m read11111
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परिवार

परिवार केवल एक शब्द ही नहीं है, या केवल कुछ लोगों के सामंजस्य को अथवा एक घर में रहने भर को परिवार नहीं कहते हैं। परिवार एक ऐसा आधार है, जिसका जीवन में अत्यंत महत्व है। आज के समय में परिवार का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है— शहरों में अलग, गांवों में...

Er. Rajan Soni
3m read790
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तुम मनाना प्रिए

प्रेम हो गर तो उसको निभाना प्रिए,प्रीत के पृष्ठ पर ख्वाब सजाना प्रिए,रूठ जाऊ गर मैं तो किसी बात पर,अंक में अपने लेकर तुम मनाना प्रिए।।कोई कुछ भी कहे साथ छोड़ना नहीं,रूठ कर मुख अपना तुम मोड़ना नहीं,होकर परेशान नखरे भले ही करना प्रिए,स्नेह का डोर कभ...

Er. Rajan Soni
1m read1021
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माता जो निकली कुमाता

बचपन से ही मैं त्रस्त हो गया, जीवन मेरा कष्ट हो गयासुख की दशा को भूला मैं इसके झूले में कभी न झूला मैं घूट अश्रु के पीता मैं अत्याचारों से घिरकर जीता मैं कभी कभी ममता के फूल खिलेफिर निर्ममता के मेघ घिरे भूखे पढ़ने कभी मैं जाता फिर दोपहर का भोजन भी...

Er. Rajan Soni
1m read1200
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रिश्ते

बस ये जो रिश्ते बन रहे है आजकल,कुछ दिनों में ही खुदबखुद जाते है ढल,वो पहले जैसा लगाव हो जाता है कमजो बहुत बाते है करता वही पड़ जाता है नम,जैसे वो आरम्भ वाली प्यास हो जाती है खत्म,फिर बेसुरे होने लगते है धीरे धीरे उसके सारे नज़्म,फिर क्या सारी बाते...

Er. Rajan Soni
1m read1021
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अकेला

विषय:- अकेलाजब भी हो तू इस दुनिया से विह्वल,मचने लगे अंतर्मन में भी हलचल,सारे विकल्प भी हो जाए जब निष्फल,मचे जब भी चारों तरफ से कोलाहल,छोड़ इस मायानगरी को तू बढ़ अकेला।।कोई बांधा यदि आए जोकुछ अड़चन मन में छाए तोजब सब हिम्मत छुट जाए तोयदि संकट के ब...

Er. Rajan Soni
1m read971
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सभ्यता का पतन

मानवता से नाता तोड़ दियापशुता से नाता जोड़ लियापाश्चात्य संस्कृत को अपना करकेअपनी सभ्यता का पतन कियाशील, क्षमा, संतोष, दयावो मानव के थे बहुमूल्य आभूषणजो खोकर प्रेम का गहना देखोपशुवत जीने को मजबूर हुआछोड़ अमृत रस का प्यालाहलाहल विष का पान कियामानवत...

Er. Rajan Soni
1m read1001
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प्रेम

प्रेम में रूठ कर रह सका कौन है,हृदय की पीड़ा को कह सका कौन है,बिन प्रिए के हर शाम सूनी यहां,स्नेह वेदना को अश्रु से धुल सका कौन है।।प्रेम के गीत अब मैं सुनाऊं तुम्हे,हर एक पल मैं गुनगुनाऊं तुम्हे,प्रीत के पृष्ठ पर नाम तेरा लिखूं,आओ मिलने को फिर से...

Er. Rajan Soni
1m read940
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प्रीत

प्रीत ऐसा कहा जो किया जा सके,अपनी उलझन किसी को दिया जा सके,खुद ही जलते रहो इसमें उम्र भर,प्रेम पीड़ा ऐसा कहा जो सहा जा सके।।प्रीत का होना कठिन है प्रिए,प्रेम में रोना कठिन है प्रिए,खा जाते है धोखा इसी प्रेम में,प्रेम कर किसी एक का होना कठिन है प्र...

Er. Rajan Soni
1m read1111
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मजदूर दिवस

हाथों में औज़ार लिए, वह अपने काम को जाता है,मेहनत की रोटी खातिर, हर दिन पसीना बहाता है।धूप हो चाहे बारिश हो, कभी नहीं रुक पाता है,अपने श्रम से ही वह जीवन का दीप जलाता है।चिंता जिसे केवल इतनी की आज खर्चा कैसे चलाऊंगा,नहीं कुछ तो चाट पकोड़े बच्चों क...

Er. Rajan Soni
1m read11933
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