एक ही गलती दुबारा कर गए,फिर से वो मुझसे किनारा कर गए,जिस राह पर साथ चलने का वादा था ,उसी राह पर हमें तन्हा कर गए।।अकेले मुझको छोड़ गए बंधन सारा तोड़ गए वापस न आए फिर से मुझसे मुख अपना मोड़ गए।।इंजीनियर राजन सोनीअम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

तोड़ दो सारे बंधन सुनो तुम प्रिये,छोड़ दो सारे क्रंदन सुनो तुम प्रिये।अब न रोको हृदय की उमड़ती लहर,खोल दो मन के स्पंदन सुनो तुम प्रिये।प्रेम की राह में जो भी दीवार है,आज कर दो वह खंडन सुनो तुम प्रिये।मैं तुम्हारा रहूँ, तुम हमारी रहो,बस यही है निवे...

परिवार केवल एक शब्द ही नहीं है, या केवल कुछ लोगों के सामंजस्य को अथवा एक घर में रहने भर को परिवार नहीं कहते हैं। परिवार एक ऐसा आधार है, जिसका जीवन में अत्यंत महत्व है। आज के समय में परिवार का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है— शहरों में अलग, गांवों में...

प्रेम हो गर तो उसको निभाना प्रिए,प्रीत के पृष्ठ पर ख्वाब सजाना प्रिए,रूठ जाऊ गर मैं तो किसी बात पर,अंक में अपने लेकर तुम मनाना प्रिए।।कोई कुछ भी कहे साथ छोड़ना नहीं,रूठ कर मुख अपना तुम मोड़ना नहीं,होकर परेशान नखरे भले ही करना प्रिए,स्नेह का डोर कभ...

बचपन से ही मैं त्रस्त हो गया, जीवन मेरा कष्ट हो गयासुख की दशा को भूला मैं इसके झूले में कभी न झूला मैं घूट अश्रु के पीता मैं अत्याचारों से घिरकर जीता मैं कभी कभी ममता के फूल खिलेफिर निर्ममता के मेघ घिरे भूखे पढ़ने कभी मैं जाता फिर दोपहर का भोजन भी...

बस ये जो रिश्ते बन रहे है आजकल,कुछ दिनों में ही खुदबखुद जाते है ढल,वो पहले जैसा लगाव हो जाता है कमजो बहुत बाते है करता वही पड़ जाता है नम,जैसे वो आरम्भ वाली प्यास हो जाती है खत्म,फिर बेसुरे होने लगते है धीरे धीरे उसके सारे नज़्म,फिर क्या सारी बाते...
विषय:- अकेलाजब भी हो तू इस दुनिया से विह्वल,मचने लगे अंतर्मन में भी हलचल,सारे विकल्प भी हो जाए जब निष्फल,मचे जब भी चारों तरफ से कोलाहल,छोड़ इस मायानगरी को तू बढ़ अकेला।।कोई बांधा यदि आए जोकुछ अड़चन मन में छाए तोजब सब हिम्मत छुट जाए तोयदि संकट के ब...

मानवता से नाता तोड़ दियापशुता से नाता जोड़ लियापाश्चात्य संस्कृत को अपना करकेअपनी सभ्यता का पतन कियाशील, क्षमा, संतोष, दयावो मानव के थे बहुमूल्य आभूषणजो खोकर प्रेम का गहना देखोपशुवत जीने को मजबूर हुआछोड़ अमृत रस का प्यालाहलाहल विष का पान कियामानवत...

प्रेम में रूठ कर रह सका कौन है,हृदय की पीड़ा को कह सका कौन है,बिन प्रिए के हर शाम सूनी यहां,स्नेह वेदना को अश्रु से धुल सका कौन है।।प्रेम के गीत अब मैं सुनाऊं तुम्हे,हर एक पल मैं गुनगुनाऊं तुम्हे,प्रीत के पृष्ठ पर नाम तेरा लिखूं,आओ मिलने को फिर से...
प्रीत ऐसा कहा जो किया जा सके,अपनी उलझन किसी को दिया जा सके,खुद ही जलते रहो इसमें उम्र भर,प्रेम पीड़ा ऐसा कहा जो सहा जा सके।।प्रीत का होना कठिन है प्रिए,प्रेम में रोना कठिन है प्रिए,खा जाते है धोखा इसी प्रेम में,प्रेम कर किसी एक का होना कठिन है प्र...

हाथों में औज़ार लिए, वह अपने काम को जाता है,मेहनत की रोटी खातिर, हर दिन पसीना बहाता है।धूप हो चाहे बारिश हो, कभी नहीं रुक पाता है,अपने श्रम से ही वह जीवन का दीप जलाता है।चिंता जिसे केवल इतनी की आज खर्चा कैसे चलाऊंगा,नहीं कुछ तो चाट पकोड़े बच्चों क...
