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प्रेम

प्रेम में रूठ कर रह सका कौन है,

हृदय की पीड़ा को कह सका कौन है,

बिन प्रिए के हर शाम सूनी यहां,

स्नेह वेदना को अश्रु से धुल सका कौन है।।

प्रेम के गीत अब मैं सुनाऊं तुम्हे,

हर एक पल मैं गुनगुनाऊं तुम्हे,

प्रीत के पृष्ठ पर नाम तेरा लिखूं,

आओ मिलने को फिर से बुलाऊं तुम्हें।।

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