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मजदूर दिवस

हाथों में औज़ार लिए, वह अपने काम को जाता है,
मेहनत की रोटी खातिर, हर दिन पसीना बहाता है।
धूप हो चाहे बारिश हो, कभी नहीं रुक पाता है,
अपने श्रम से ही वह जीवन का दीप जलाता है।

चिंता जिसे केवल इतनी की आज खर्चा कैसे चलाऊंगा,

नहीं कुछ तो चाट पकोड़े बच्चों के लिए लेकर जाऊंगा,

हाथों में मेहनत के छाले फिर भी जो हार न माने,

उसको क्या कोई मेहनत में पीछे कर पाएगा।।

इंजीनियर राजन सोनी

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