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तुम मनाना प्रिए

प्रेम हो गर तो उसको निभाना प्रिए,

प्रीत के पृष्ठ पर ख्वाब सजाना प्रिए,

रूठ जाऊ गर मैं तो किसी बात पर,

अंक में अपने लेकर तुम मनाना प्रिए।।

कोई कुछ भी कहे साथ छोड़ना नहीं,

रूठ कर मुख अपना तुम मोड़ना नहीं,

होकर परेशान नखरे भले ही करना प्रिए,

स्नेह का डोर कभी भी तोड़ना नहीं।।

इंजीनियर राजन सोनी

Baatcheet(1)

5.0(1)