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Prashant Singh Rajpoot

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Personal Story

भाग 6 "टूटता परिवार और एक दर्दनाक मोड़"

एक दिन पिता घर पर एक नई नवेली दुल्हन के साथ लौटे। दादी ने उनसे कुछ सवाल किए, और फिर वे दोनों उस महिला को लेकर कमरे में चले गए। मैं और माँ रसोई में बैठे थे। थोड़ी देर बाद, दादी, माँ के पास आईं और कुछ कहा। माँ की आँखें भर आईं। मैं, अपने चार साल के म...

Prashant Singh Rajpoot
5m read80
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भाग 5 "हौंसले की बुनियाद"

एक शिक्षक की दृष्टिजीवन में कई बार ऐसी विषम परिस्थितियाँ आती हैं, जब व्यक्ति निराशा के अंधकार में खो जाता है। ऐसी स्थिति में आत्मघाती विचार आना एक तात्कालिक प्रतिक्रिया हो सकती है। लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि इन कठिन क्षणों में आत्म निरीक्षण और सं...

Prashant Singh Rajpoot
5m read70
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अगला भाग

इंसाफ सिर्फ सज़ा देने में नहीं,बल्कि उन कारणों को समझने में भी है,जो किसी को अपराधी बनने पर मजबूर कर देते हैं।“सच वही नहीं जो दिखाया गया…सच वह है जो छिपा है।”“जब तक लालच ज़िंदा है…न्याय सिर्फ एक भ्रम है।”झूठे आरोप…बर्बाद होते परिवार…टूटती ज़िंदगिय...

Prashant Singh Rajpoot
1m read170
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भाग 4 "मुलाक़ात की खिड़की: खामोश आँसुओं की आवाज़"

मुलाक़ात की घड़ी आ गई थी। मेरा हृदय मेरे घरवालों को देखने के लिए तरस रहा था। मैंने मन में संकल्प किया कि अपने आंसुओं को रोके रखना है।मुलाक़ात की खिड़की पर ले जाया गया। लोहे की सलाखों के साथ कांच से बनी खिड़कियां थीं। जिसमें दोनों तरफ फोन रखे थे। मानसी,...

Prashant Singh Rajpoot
7m read190
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भाग 3 "रात की करवटें: मौत के किनारे से लौटती सोच"

रात गहरी हो चली थी। चारों ओर अजनबी साँसों की आवाज़ें और कुछ कैदियों की हल्की-फुल्की बातचीत थी। लेकिन मेरे कानों में केवल अपने ही विचारों की गूँज थी। आत्महत्या—यही एकमात्र विकल्प बचा था, यही सोचकर आया था यहाँ तक। लेकिन तभी दिल ने सवाल किया, “अगर मै...

Prashant Singh Rajpoot
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भाग 2 "हथकड़ी की झनझनाहट: टूटती उम्मीदों की शुरुआत"

पुलिस वाले आगे बढ़े, मेरी कलाई पर ठंडी, कठोर हथकड़ियाँ डाल दीं। वो झनझनाती आवाज़ मेरे पूरे अस्तित्व को हिला गई।प्रिया फफककर रो पड़ी, “नहीं! मेरे पति निर्दोष हैं!”अवनी ने आंसू पोंछते हुए कहा, “जीजा जी, अगर कुछ गलत हुआ तो मैं भी मर जाऊंगी।”मैंने उसे...

Prashant Singh Rajpoot
6m read270
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जस्टिस 404

गाँव की सुबह: प्रकृति का जादुई आलिंगनसुबह के ठीक 5:30 बजे मोबाइल का अलार्म बजा, लेकिन नींद खुलने से पहले ही पक्षियों की चहचहाहट कानों में मिश्री घोल चुकी थी। जैसे ही आंखें खुलीं, एक अजीब-सी ताजगी का अनुभव हुआ। गाँव की सुबह सच में जादुई होती है! ठं...

Prashant Singh Rajpoot
6m read280