🌸 बोलो कान्हा अब मुरली क्यों बजाते नहीं 🌸आ के वृंदावन में गइया चराते नहीं,बोलो कान्हा अब मुरली क्यों बजाते नहीं।आ के गोपी के घर माखन चुराते नहीं,बोलो कान्हा अब मुरली क्यों बजाते नहीं॥ग्वाल-बालों संग अब रास रचाते नहीं,यमुना तट पे कान्हा अब तुम आत...

अबकी जब सावन बरसा नहीं,कोई अपना भी दिल से हँसा नहीं।बारिश तो हुई शहर की गलियों में,पर मेरे आँगन में कुछ भी खिला नहीं। ✍️🌧️हुई बरसात सावन में, उमंगें खिल गईं फिर से,बुझी-सी थी जो दिल में, वो तरंगें मिल गईं फिर से।घटा छाई, फुहारें आईं, महक उठा ये स...

मैं तुमको रिझाने चला आऊँगा,हृदय से लगाने चला आऊँगा।अगर रूठ जाओ कभी तुम मुझसे,तुम्हें फिर से मनाने चला आऊँगा।तुम्हारी खुशी में ही खुशियाँ मेरी,ये एहसास दिलाने चला आऊँगा।जो बातें अधूरी रह गईं हैं कहीं,वो सारी बाते सुनाने चला आऊँगा। मैं तुमको रिझाने ...

लेखक की कुछ अनुभूति,मैं अपने सपनों में लेकर उतरा हूँ।हारा हुआ हूँ बेशक भले ही,मगर नहीं, मैं भी बिखरा हुआ हूँ।ठोकरों ने राह दिखाई है,दर्द ने मुझको सिखाया है।जो ख्वाब कभी आँखों में थे,उन्हीं ख्वाबों को लेकर खड़ा हुआ हूँ।अभी मंज़िल कहाँ मिली है मुझे,...
पहली बार मुस्कुराकर के उसने घायल कर दिया,मैं संभला ही था, उसने फिर से मुस्कुरा दिया।न जाने क्या कशिश थी उसकी उस मुस्कान में,एक पल में ही दिल को अपना बना लिया।सोचा था बचा लूँगा खुद को उसकी नजरों से,मगर उसने नजरें मिलाकर फिर से हँसा दिया।मैं समझता र...

लड़ी लड़ाई मरते दम तक,फिर भी हार न माने थे।हो गए शहीद वतन के खातिर,वो भारत माँ के दीवाने थे।सीने पर गोलियाँ खाकर भी,हँसते-हँसते बलिदान दिए।माटी का कर्ज़ चुकाने को,अपने प्राणों के दान दिए।फाँसी के फंदे चूम लिए,पर देश का मान न झुकने दिया।आँखों में आ...

कहीं हैं व्रत रखते तो कहीं जल चढ़ाते सावन में, कहीं शिव को मनाते तो कहीं गीत गाते सावन में। बम-बम भोले की गूँज से महक उठता है हर आँगन, हर दिल में प्रेम जगाते हैं भोलेनाथ सावन में।।कोई गाड़ी से चलता है, कोई मोटर से जाता है,कोई पैदल ही भोले की नगरी ...

कर प्रीत मैंने तुमसे सपना साकार कर लिया है,मेरे प्रभु ने मुझ पर बड़ा उपकार कर दिया है।तेरी मुस्कान से महका मेरे हृदय का कोमल उपवन,पाकर तेरा प्रेम मैंने जीवन गुलज़ार कर लिया है।तेरी आँखों में जब-जब मैंने अपना संसार देखा,हर दुआ में बस तेरा ही स्नेह ...

कलमों का सम्मान बचाओ,मेहनत का अधिकार बचाओ।जो सपनों की राह चले हैं,उनका भी संसार बचाओ।माँ की आँखों का है सपना,पिता के श्रम की ये कमाई।एक परीक्षा केवल अंक नहीं,पूरे घर की है सच्चाई।रात-रात भर जागने वालों,क्यों आँखों में नमी रहे?सच्ची मेहनत करने वाले...
भाग 4: नया इतिहास (अंतिम भाग)मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। धीरज ने कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में महारत हासिल कर ली। उसने अपनी खुद की एक ऐसी एप्लिकेशन (App) बनाई जो पहाड़ी क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को आसान बनाती थी, ताकि किसी और धीर...

भाग 2: दिल्ली का क्रूर चेहरा"सैलरी? कैसी सैलरी बे?" ढाबे के मालिक मंगत राम ने बीड़ी का धुआँ उड़ाते हुए कहा।धीरज दंग रह गया, "साब, आपने तीन हजार रुपये महीना कहा था। मुझे माँ की दवाई के लिए गाँव पैसे भेजने हैं।"मंगत राम हँसा और एक पुरानी डायरी नि...

भाग 1: बर्फीली रात और पहला कदमदेवप्रयाग से ऊपर, जहाँ नेटवर्क की आखिरी डंडी भी साथ छोड़ देती है, वहाँ बसा है 'सिल्टा' गाँव। अठारह साल का धीरज इस वक्त अपनी फटी हुई जैकेट में सिकुड़ा हुआ था। कमरे के कोने में रखी ढिबरी की मद्धम रोशनी में उसने अपनी मा...

विषय:- अकेलाजब भी हो तू इस दुनिया से विह्वल,मचने लगे अंतर्मन में भी हलचल,सारे विकल्प भी हो जाए जब निष्फल,मचे जब भी चारों तरफ से कोलाहल,छोड़ इस मायानगरी को तू बढ़ अकेला।।कोई बांधा यदि आए जोकुछ अड़चन मन में छाए तोजब सब हिम्मत छुट जाए तोयदि संकट के ब...

खबर लगी जब कान्हा को की ,सब गोपी सरजू तट पे आय रही है।विचार मग्न हुए तब मोहन और,उनको सबक सिखाने की युक्ति विचारी।चढ़ गए कदंब वट पर माधव और ,सभी ग्लावन को समझाए दिया री।बाट जोहत कुछ क्षण बीते,इतने में गोपियों की जत्था आय गया री।आते ही सब वस्त्र उता...

बस ये जो रिश्ते बन रहे है आजकल,कुछ दिनों में ही खुदबखुद जाते है ढल,वो पहले जैसा लगाव हो जाता है कमजो बहुत बाते है करता वही पड़ जाता है नम,जैसे वो आरम्भ वाली प्यास हो जाती है खत्म,फिर बेसुरे होने लगते है धीरे धीरे उसके सारे नज़्म,फिर क्या सारी बाते...
