विषय:- अकेलाजब भी हो तू इस दुनिया से विह्वल,मचने लगे अंतर्मन में भी हलचल,सारे विकल्प भी हो जाए जब निष्फल,मचे जब भी चारों तरफ से कोलाहल,छोड़ इस मायानगरी को तू बढ़ अकेला।।कोई बांधा यदि आए जोकुछ अड़चन मन में छाए तोजब सब हिम्मत छुट जाए तोयदि संकट के ब...

खबर लगी जब कान्हा को की ,सब गोपी सरजू तट पे आय रही है।विचार मग्न हुए तब मोहन और,उनको सबक सिखाने की युक्ति विचारी।चढ़ गए कदंब वट पर माधव और ,सभी ग्लावन को समझाए दिया री।बाट जोहत कुछ क्षण बीते,इतने में गोपियों की जत्था आय गया री।आते ही सब वस्त्र उता...

बस ये जो रिश्ते बन रहे है आजकल,कुछ दिनों में ही खुदबखुद जाते है ढल,वो पहले जैसा लगाव हो जाता है कमजो बहुत बाते है करता वही पड़ जाता है नम,जैसे वो आरम्भ वाली प्यास हो जाती है खत्म,फिर बेसुरे होने लगते है धीरे धीरे उसके सारे नज़्म,फिर क्या सारी बाते...
