भाग 4: नया इतिहास (अंतिम भाग)मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। धीरज ने कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में महारत हासिल कर ली। उसने अपनी खुद की एक ऐसी एप्लिकेशन (App) बनाई जो पहाड़ी क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को आसान बनाती थी, ताकि किसी और धीर...

भाग 2: दिल्ली का क्रूर चेहरा"सैलरी? कैसी सैलरी बे?" ढाबे के मालिक मंगत राम ने बीड़ी का धुआँ उड़ाते हुए कहा।धीरज दंग रह गया, "साब, आपने तीन हजार रुपये महीना कहा था। मुझे माँ की दवाई के लिए गाँव पैसे भेजने हैं।"मंगत राम हँसा और एक पुरानी डायरी नि...

भाग 1: बर्फीली रात और पहला कदमदेवप्रयाग से ऊपर, जहाँ नेटवर्क की आखिरी डंडी भी साथ छोड़ देती है, वहाँ बसा है 'सिल्टा' गाँव। अठारह साल का धीरज इस वक्त अपनी फटी हुई जैकेट में सिकुड़ा हुआ था। कमरे के कोने में रखी ढिबरी की मद्धम रोशनी में उसने अपनी मा...

विषय:- अकेलाजब भी हो तू इस दुनिया से विह्वल,मचने लगे अंतर्मन में भी हलचल,सारे विकल्प भी हो जाए जब निष्फल,मचे जब भी चारों तरफ से कोलाहल,छोड़ इस मायानगरी को तू बढ़ अकेला।।कोई बांधा यदि आए जोकुछ अड़चन मन में छाए तोजब सब हिम्मत छुट जाए तोयदि संकट के ब...

खबर लगी जब कान्हा को की ,सब गोपी सरजू तट पे आय रही है।विचार मग्न हुए तब मोहन और,उनको सबक सिखाने की युक्ति विचारी।चढ़ गए कदंब वट पर माधव और ,सभी ग्लावन को समझाए दिया री।बाट जोहत कुछ क्षण बीते,इतने में गोपियों की जत्था आय गया री।आते ही सब वस्त्र उता...

बस ये जो रिश्ते बन रहे है आजकल,कुछ दिनों में ही खुदबखुद जाते है ढल,वो पहले जैसा लगाव हो जाता है कमजो बहुत बाते है करता वही पड़ जाता है नम,जैसे वो आरम्भ वाली प्यास हो जाती है खत्म,फिर बेसुरे होने लगते है धीरे धीरे उसके सारे नज़्म,फिर क्या सारी बाते...
