
विषय:- अकेला
जब भी हो तू इस दुनिया से विह्वल,
मचने लगे अंतर्मन में भी हलचल,
सारे विकल्प भी हो जाए जब निष्फल,
मचे जब भी चारों तरफ से कोलाहल,
छोड़ इस मायानगरी को तू बढ़ अकेला।।
कोई बांधा यदि आए जो
कुछ अड़चन मन में छाए तो
जब सब हिम्मत छुट जाए तो
यदि संकट के बादल आए तो
छोड़ सारी उम्मीदों को तू बढ़ अकेला।।
जब चारों तरफ से तन्हाई मिले,
जब अपनो में भी कोई न भाई मिले,
जब विश्वासी से भी बेवफाई मिले,
जब हर पथ पर तुमको खाई मिले,
तोड़ सारे वादों को तू बढ़ अकेला।।
इंजीनियर राजन सोनी
अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश