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यमुना तट पर लीला

खबर लगी जब कान्हा को की ,

सब गोपी सरजू तट पे आय रही है।

विचार मग्न हुए तब मोहन और,

उनको सबक सिखाने की युक्ति विचारी।

चढ़ गए कदंब वट पर माधव और ,

सभी ग्लावन को समझाए दिया री।

बाट जोहत कुछ क्षण बीते,

इतने में गोपियों की जत्था आय गया री।

आते ही सब वस्त्र उतार कर,

यमुना जी में डुबकी लगाय लिया री।

छिपकर बैठे वृक्ष डाल पर,

अब पर दृष्टि गड़ाय दिया री

झटपट उतरे है पेड़ से कान्हा,

और सबका वस्त्र छिपाय दिया री ।

यमुना जी से बाहर निकल अब गोपी

वस्त्र को अपने ढूंढ रही है

तभी अचानक कही से किसी की मुस्कान

सुनाय दिया री।

ऊपर निहारे जब वृक्ष डाल पर

मुरलीधर उनको दिखाई दिए री।

सब बोली है कैसी ये ठिठोली हे कान्हा

जो तुम अब वस्त्रों को छिपाय रहे हो।

शर्म न आती तुमको हे मोहन ,

जो ऐसी लीला रचाय रहे हो।।

✍️✍️ स्वरचित

इंजीनियर राजन सोनी

https://jeenekirahkavitasangrah.blogspot.com/2026/04/blog-post.html

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