'तिलक' बचा गया, पर इंसानियत का क्या?— मेरा एक कड़वा अनुभव और समाज का आत्मचिंतनरात के साढ़े दस बज चुके थे। आसमान काले-स्याह बादलों से घिरा हुआ था। तेज आंधी चल रही थी और बारिश की हल्की बौछारों को झेलते हुए मैं अपनी मोटरसाइकिल से घर की ओर निकला था। आ...

अमरावती की सुबह सिर्फ सूरज की रोशनी लेकर नहीं आती, बल्कि अपने साथ एक अनोखा सुकून लेकर आती है। अंबादेवी और एकविरा देवी मंदिर की घंटियों की गूंज, पोहरा के जंगलों से छनकर आती शुद्ध हवा, और सड़कों पर दौड़ते-भागते युवा। यह शहर सपनों का शहर है, लेकिन इन...

जिंदगी का जुगाड़...!शाम के सात बज चुके थे। अमरावती बस स्टैंड पर मुसाफिरों की गहमागहमी थी। आसमान में काले बादल घिरे थे और ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त मूसलाधार बारिश शुरू हो जाएगी। रमेश अपने पुराने सूटकेस पर बैठा घड़ी देख रहा था। उसे रात की स्लीपर...

"मौन की ताकत: जब चुप रहना चिल्लाने से ज्यादा असरदार होता है" महानगर की एक नामचीन विज्ञापन एजेंसी का कॉन्फ्रेंस रूम बहस की गर्मी से उबल रहा था। मेज के एक तरफ कंपनी के सबसे वरिष्ठ और आक्रामक मैनेजर, राघव चिल्ला रहे थे। उनका चेहरा गुस्से से लाल था, आ...

मुट्ठी में बंद रेत और हौसलों की उड़ान..!हिमालय की ऊँची, बर्फीली चोटियों की गोद में बसा था एक छोटा सा गाँव—'सोनपुर'। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस गाँव की सबसे बड़ी त्रासदी यह थी कि यहाँ विकास की किरणें अब तक नहीं पहुँची थीं। पहाड़ी इलाका होने के कार...

अकेलेपन की परछाई: एक सफरभीड़ में गुम एक चेहराशहर की इस चमचमाती सड़क पर हर तरफ लोग थे। कोई फोन पर हंस रहा था, कोई जल्दी में दौड़ रहा था। लेकिन उस ऊंची इमारत की खिड़की पर खड़ा समर सोच रहा था कि इतने लोगों के बीच भी दिल के अंदर एक अजीब सा सन्नाटा क्य...

"मैं भी दरिया हूँ..."यह सिर्फ एक जुमला नहीं, कबीर के भीतर सुलगता हुआ वह अंगारा था, जिसे वक्त की धूल और सिस्टम की बंदिशें बुझा नहीं पाई थीं।कबीर एक सुदूर गाँव के सरकारी स्कूल में शिक्षक था। टूटी हुई छत, ब्लैकबोर्ड के नाम पर पुती हुई काली दीवार और ब...

विफलता से मिली नई राह..!कहते हैं कि समंदर कितना भी गहरा हो, एक कश्ती अगर ठान ले, तो लहरों को चीरकर किनारा पा ही लेती है। यह कहानी भी एक ऐसी ही कश्ती की है, जिसने जिंदगी के सबसे भयानक तूफ़ान का सामना किया और जीत हासिल की।मुश्किल वह दौर मेरी जिंदगी क...

जब फेल्युअर ने मुझे एक नया रास्ता दिखाया..!'हार', 'असफलता', 'फेल्युअर'—ये वो शब्द हैं, जिन्हें सुनते ही हमारे भीतर एक अजीब सा डर बैठ जाता है। समाज में अक्सर सफलता को एक ऊंचे मंच पर बिठाया जाता है और असफलता को एक अंधेरे कोने में धकेल दिया जाता है। ...

यह कहानी किसी और की नहीं, शायद आपकी है, मेरी है, या उस हर इंसान की है जो रोज सुबह अपनी आंखों में एक अधूरी उम्मीद लेकर जागता है।यह कहानी है कबीर की, और उसके उस सपने की... जिसे वो आज भी चेस कर रहा है।भाग 1: शहर की रोशनी और वो पुराना सूटकेसघड़ी में र...

पिता का पसीना, मां का सोना और व्यवस्था द्वारा जलाई गई चिताएं!- महेश ठाकरे, संपर्क: 7745823492लातूर के गातेगांव की वह काली रात... घर के एक छोटे से कमरे में १८ साल की मैथिली पढ़ाई की किताब खोले शून्य नजरों से पंखे की तरफ देख रही थी। उसकी आंखों के सा...

वो रिश्ता जिसने मुझे बेहतर बनाया..!हमारे जीवन में कई लोग आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो हमारे भीतर एक खामोश क्रांति लाते हैं। वे हमें केवल यह नहीं बताते कि हम क्या हैं, बल्कि हमें यह एहसास दिलाते हैं कि हम क्या बन सकते ह...

मैने जिंदगी बहुत कुछ सिखा है. जिंदगी ने मुझे बहोत कुछ सिखाया है. कुछ रिश्तेदारेने सिखाया. कुछ मेरे मुश्किल वक्त न सिखाया. और कुछ डीजे मुझे मेरे वक्त के तजुर्वेने सिखाया. जो भी सीख पाया कुछ अच्छा था और कुछ बहुत बुरा था. लेकिन जो भी था वो जिंदगी का ...
