Back to feed

विफलता से मिली नई राह..!

विफलता से मिली नई राह..!

कहते हैं कि समंदर कितना भी गहरा हो, एक कश्ती अगर ठान ले, तो लहरों को चीरकर किनारा पा ही लेती है। यह कहानी भी एक ऐसी ही कश्ती की है, जिसने जिंदगी के सबसे भयानक तूफ़ान का सामना किया और जीत हासिल की।

मुश्किल

वह दौर मेरी जिंदगी का सबसे स्याह पन्ना था। चारों तरफ से मुश्किलों ने मुझे इस तरह घेर लिया था कि सांस लेना भी दूभर था। एक तरफ आर्थिक तंगी का पहाड़ टूट पड़ा था, तो दूसरी तरफ अपनों का भरोसा भी धीरे-धीरे डगमगा रहा था। रात-रात भर नींद नहीं आती थी, बस आँखों में एक ही सवाल तैरता था—"क्या कल की सुबह कोई नई उम्मीद लाएगी?"

हालात ऐसे थे कि जेब खाली थी और दिल उम्मीदों से। जब आप हर तरफ से हार रहे होते हैं, तो सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब आपको खुद की काबिलियत पर शक होने लगे। वह मानसिक तनाव, वह अकेलेपन का अहसास और हर दिन का वह घुटता हुआ दम... शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। ऐसा लगता था जैसे मैं एक अंतहीन अंधेरी सुरंग में फंसा हुआ हूँ, जहाँ दूर-दूर तक रोशनी की कोई किरण नहीं थी।

सफर

लेकिन, मैंने घुटने टेकने से इनकार कर दिया। मैंने तय किया कि मैं लड़ूँगा। शुरुआत बेहद कठिन थी। रास्ते में अनगिनत उतार-चढ़ाव आए। कई बार ऐसा हुआ कि दो कदम आगे बढ़ता, तो जिंदगी चार कदम पीछे धकेल देती।

लगातार असफलताएँ: मैंने जो भी नया काम शुरू करने की कोशिश की, उसमें शुरुआती नाकामयाबी ही हाथ लगी। लोग पीठ पीछे हँसते थे और ताने देते थे।

छोटी जीत का हौसला: इस लंबे संघर्ष में मैंने एक बात सीखी—बड़ी जीत का इंतजार मत करो, छोटी-छोटी जीतों का जश्न मनाओ। जब हफ़्तों की मेहनत के बाद पहला छोटा सा काम सफल हुआ, या जब पहली बार किसी अजनबी ने मेरे काम की तारीफ की, तो वह मेरे लिए किसी ऑस्कर से कम नहीं था। इन छोटी-छोटी जीतों ने मेरे भीतर के बुझते हुए दीए को जलाए रखा।यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ। इसमें रातों की नींद, पसीना और न जाने कितने आँसू बहे थे।

वो मोड़ ..

कहते हैं कि रात जितनी घनी होती है, सवेरा उतना ही नजदीक होता है। मेरी जिंदगी में भी वह जादुई लम्हा (Turning Point) आया, जिसने सब कुछ बदल दिया।लगातार मिल रही छोटी-छोटी जीतों और मेरे अथक प्रयास के बाद, मुझे एक बहुत बड़ा अवसर मिला। एक ऐसा प्रोजेक्ट, जिसके लिए मैंने अपनी पूरी जान लगा दी थी। जिस दिन उस प्रोजेक्ट का परिणाम आया, वह मेरी जिंदगी का'Breakthrough' था। न सिर्फ वह प्रयास बेहद सफल रहा, बल्कि उसने मेरे पिछले सारे नुकसान और असफलताओं को एक झटके में मिटा दिया। जो लोग कल तक मेरे तरीकों पर सवाल उठा रहे थे, आज वे मेरी लगन की मिसाल दे रहे थे। उस दिन पहली बार मैंने सुकून की सांस ली और महसूस किया कि अंधेरा आखिरकार छंट चुका था।

आप भी कर सकते हो ...

दोस्त, अगर आज आप भी जिंदगी के किसी ऐसे ही दौर से गुजर रहे हैं जहाँ सब कुछ बिखरा हुआ लग रहा है, तो मेरी यह बात हमेशा याद रखना—आप अकेले नहीं हैं, और यह वक्त भी परमानेंट नहीं है।

खुद पर भरोसा रखें: जब दुनिया आप पर शक करे, तब भी अपने भीतर की आवाज को मत मरने देना।

लगातार चलते रहें: सफर में मुश्किलें आएँगी, पैर थकेंगे, लेकिन रुकना मत। कछुए की चाल से ही सही, पर हर रोज एक छोटा कदम बढ़ाते रहें।

परिस्थितियों को खुद पर हावी न होने दें: आपकी आज की परिस्थिति आपका भविष्य तय नहीं करती, बल्कि आपका आज का संघर्ष यह तय करता है कि आप कल कहाँ होंगे।यदि मैं उस गहरे अंधेरे से निकलकर यहाँ तक पहुँच सकता हूँ, तो यकीन मानिए,

आप भी यह कर सकते हैं! उठिए, अपनी धूल झाड़िए और एक बार फिर पूरी ताकत से कोशिश कीजिए। जीत आपका इंतजार कर रही है।

Baatcheet