रात के 10 बजने वाले हैँ. कुछ लिखने का मन किया बड़े दिनों बाद. आज ही दो दिन की छुट्टी के बाद वापस कौडीराम आयी हूँ. अब ज्यादातर रोडवेज बस से आती जाती हूँ. पैसा और समय दोनों की बचत. हाँलाकि अपनी गाड़ी हैँ, पर ड्राइविंग स्किल थोड़ी अच्छी नहीं हैँ तो वो क...

भाव नहीं जिसके मन में मानव नहीं आतंकी है क्या सच है कश्मीर हमारा है या फिर सारी नौटंकी है.ओ खुनी मतवालोक्या बच्चों का दर्द नहीं देखा, छीन सुहाग की लाली को क्यों खींच रहे वैमनस्य की रेखा.ओ धर्म के ठेकेदारों क्यों बंदूक चलाते हो जैसी करनी वैसी भरनी ...

जब-जब रूप निहारोगे,मंत्र मुग्ध हो जाओगे|दर्पण के सम्मुख जब जाकर,स्वयं से ही बतियाओगे|कुछ दिन का बस चक्र ये होगा,फिर कुछ ऐसा पाओगे,स्निग्ध सुरम्य मनोरम काया,फिर कहां से लाओगे|दर्पण तुम्हें डराएगा,समय तुम्हें हराएगा,मां का पाखी उड़ जाएगा,तन मिट्टी ह...

टेकती लाठी कुब्ज़ा ने चली चाल, नेत्र थे टेढ़े था उसका बुरा हाल |कैकेयी ने पूछा क्यों हुआ तेरा यह हाल,मोद मना, होगा अभिषेक राम का,क्यों घूमती बनी बेहाल |बोली मंथरा, रानी यह क्या अनर्थ हुआ,तू प्रियतमा राजा की,प्रेम क्यों ना सार्थक हुआ?भरत बनेंगे राजा...
