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Kripa shukla

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आज भी तुम पहले सी हो

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"अति सदैव वर्जित "

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दृश्य टुंडला स्टेशन उत्तर प्रदेश

ट्रेन की सीटी गूंजीं जब,चिड़ियों की चहक दी सुनाई।मानो नई कहानी बुनता हो AI ।सबकी अपनी राह थी।घर अपने सब चल दिये थे।मन को मेरे कईं सवाल घेरें थे।हम तो जाते घर अपने, फिर पंक्षी यहां क्यूं बैठे थे ?   घर यही इनका था? या हमने कब्जा कर लिया था।विक...

Kripa shukla
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बचपन और हम

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तो तुम में ही हैं राम

‎तो तुम में ही हैं राम, ‎अगर करो मर्यादा का पालन,‎करो नारित्व का सम्मान,‎ह दया, कृपालुता तुममें ,‎तो तुम में ही हैं राम।‎‎‎‎जीवन कठिन हो तुम्हारा भी,‎और निष्फल हो सभी प्रयास , ‎लेते हो प्रण तुम भी जीवन में ,‎सदृढ़ है तुममें वचन विराट,‎साथ ही हल्की...

Kripa shukla
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bas lete ana koi kitab

तुम मत देना मुझे ,‎कोई चाकलेट ,‎कोई चुड़ी ,‎कोई हार,‎मत लाना पायल बिंदी श्रृंगार ,‎मिलने आओ जब तुम मुझसे ,‎लेते आना कोई किताब ।‎हो जिसमें हिंदी कविताएं ,‎हो जिसमें प्रेम कहानी ,‎या हो संघर्ष की बातें ,‎तुम मत लाना‌,‎कोई गुलाब,‎कोई गुलदस्ता ,‎कोई त...

Kripa shukla
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जगाओं नहीं

यह कविता एक प्रेमिका का विचार है । जिसमें प्रेमी सो रहा है और प्रेमिका चाहती है कि वो और थोड़ी देर ऐसे ही सोतें रहे और वो उसे ऐसे ही निहारती रहे। यह कविता उस क्षण को केद करती है जिसमें सुकुन के पल है।✍️✍️कविता: @कृपाजगाओ नहीं, सोने दो,‎सोते हुए अच...

Kripa shukla
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Kripa shukla — Lekhak | Vyaktigat Vikas | Vyaktigat Vikas