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तो तुम में ही हैं राम

‎तो तुम में ही हैं राम,

‎अगर करो मर्यादा का पालन,

‎करो नारित्व का सम्मान,

‎ह दया, कृपालुता तुममें ,

‎तो तुम में ही हैं राम।

‎जीवन कठिन हो तुम्हारा भी,

‎और निष्फल हो सभी प्रयास ,

‎लेते हो प्रण तुम भी जीवन में ,

‎सदृढ़ है तुममें वचन विराट,

‎साथ ही हल्की हो मुस्कान,

‎तो तुम में ही हैं राम।

‎जानते हो तुम धर्म से चलना,

‎धारण है तुम में विश्वास,

‎तारा है तुमने जीवन को,

‎प्रतीक्षा को दी है श्वास ,

‎तो तुम में ही हैं राम।

‎शौर्य, वीरता का गुण तुम में,

‎सर्व परायण है सार,

‎त्यागा है शौक को तुम ने,

‎सर्वस्व दिया है त्याग,

‎तो तुम में ही हैं राम।

‎लक्ष्य तुम्हारा हो सदृढ़ ,

‎हो तुम  प्रकृति परिहार ,

‎परिचय हो तुम आदर्श का,

‎गुणो से हो सम्पन्न प्रयास ,

‎बनो राम तुम अगर नहीं हो,

‎करते हो तुम मोह परित्याग ,

‎तो तुम में ही हैं राम।

‎कृपा शुक्ल ✍️ ✍️

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