
यह कविता एक प्रेमिका का विचार है । जिसमें प्रेमी सो रहा है और प्रेमिका चाहती है कि वो और थोड़ी देर ऐसे ही सोतें रहे और वो उसे ऐसे ही निहारती रहे। यह कविता उस क्षण को केद करती है जिसमें सुकुन के पल है।✍️✍️
कविता: @कृपा
जगाओ नहीं, सोने दो,
सोते हुए अच्छे लग रहे हैं।
बात मानो तो ,
रहने दो ऐसे ही कुछ पल,
जागे हैं रात्रि के वो हर पल,
हो सकता है होगा कोई बड़ा सपना !
या सपने में आया हुआ है कोई अपना?
हो सकता है नींद में जागे हुए हैं!
बड़ी मुश्किल से खुद को ,
सुलाए हुए हैं ।
बस करो ना करो कोई प्रयत्न अब,
सोने दो उन्हें,
सोते हुए अच्छे लग रहे हैं।
होगी थकान कोई बरसों पुरानी,
मेरे कलेजे से लग कर तभी सो रहे हैं।
जगाओ नहीं, सोने दो ,
सोते हुए अच्छे लग रहे हैं ।
kripa ✍️✍️