बनारस की सुबह की शुरुआत है,हर दिल में बसती जीवन की आस है।घुली इसमें मिट्टी की मिठास है,कुल्हड़ वाली चाय कुछ खास है।भट्टी में पकती जलते कोयले के बीच,चाय पत्ती होती इसमें मुट्ठी भींच,शक्कर का मीठा सा अहसास है,अदरक का तीखा सा इसमें आभास है।स्वाद बनता...

करते है लोग बुराई हमारे शहर की,चलो देखें शान राजधानी शहर की।चकाचौंध की चादर तनी,पर सड़कों की साँसें मौन घनी।शुद्ध हवा एक लंबी सांस,ये हो गए यहां केवल आभास।प्राचीनता को ओढ़े इतिहास खड़ा है,दुर्गंध में लिपटी राजधानी पड़ी है।नदियाँ जो जीवनधारा थीं कभ...

मन ने जीवन से पूछा —यह अनवरत गति किसकी है, बतला दो,और किस भय से हम हर पलखुद से ही भाग जाते हैं, समझा दो?जीवन ने ठहर कर उत्तर दिया —अब रुकना गुण नहीं, दोष कहा जाता है,जो ठहर जाए क्षण भर भी,वह समय में असमर्थ समझा जाता है।मन ने फिर प्रश्न किया —सत्य ...

गाँव के एक छोटे से घर में रहने वाला अर्जुन हमेशा दूसरों की बातों में जीता था।“तू ये नहीं कर पाएगा…”“ये तेरे बस की बात नहीं…”ऐसे शब्द उसके आसपास हवा की तरह तैरते रहते थे और धीरे-धीरे उसने उन्हें सच मान लिया था।अर्जुन को लिखने का शौक था। रात के सन्न...
