
बनारस की सुबह की शुरुआत है,
हर दिल में बसती जीवन की आस है।
घुली इसमें मिट्टी की मिठास है,
कुल्हड़ वाली चाय कुछ खास है।
भट्टी में पकती जलते कोयले के बीच,
चाय पत्ती होती इसमें मुट्ठी भींच,
शक्कर का मीठा सा अहसास है,
अदरक का तीखा सा इसमें आभास है।
स्वाद बनता इसे और असरदार तब,
निकलती छनकर कुल्हड़ में जब,
जुबान से लगते ही मचल उठती है,
इसकी ताज़गी रग-रग में बसती है।
चुस्की और दोस्तों का संग,
भर देता जीवन में हर रंग,
अपनेपन का गहरा अहसास है,
ये कुल्हड़ वाली चाय बेहद खास है।
बनारस और उसका पारंपरिक विश्वास,
महादेव का दर्शन, चाय का मधुर एहसास,
हर घाट पर मिलती ये कुल्हड़ वाली चाय,
बनारसी कहानी संग खुशबू बिखराए।
पीकर इस चाय को सब भूल जाते हैं,
बनारस से अपनी कहानी जोड़ जाते हैं,
लौटकर पर्यटक भी यही बताते हैं,
“सब छोड़ो… चलो बनारस की चाय पीकर आते हैं।”
✍️ लेखक – बनारसी