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Kavi Raju Dhakad सरल

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Personal Story

निश्छल प्रेम

निश्चल प्रेमजिसे नवाजा हर खुशियों से, वो ही दुख से मिला गया कौन बचा इस धरती पर जो, अपनों से ना छला गयाराम रहे मर्यादित प्रति पल उनको भी वनवास दे दिया जनक नंदिनी मां सीता को इस जग ने उपहास दे दिया कपट मंथरा का कौशल्या के घर को क्यूं जला गया कौन बचा...

Kavi Raju Dhakad सरल
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Personal Story

माँ तेरी याद बहुत आती हैं।

मैंने जब खोली गुदड़ी की तुरपाई।❤️माँ मुझे बहुत याद आई।।उसके एक कोने मे लगा था,मेरे विद्यालय की गणवेश का स्वेटर।उसी से सटा के जुड़ा हुआ था,मेरे भाई का वो कबड्डीवाला नेकर।जिसे पहन कर बड़ी भाव खाती थी-बहिन की वो फेवरेट वाली फ्रॉक,क्या गजब की काम आई।मैंन...

Kavi Raju Dhakad सरल
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Personal Story

मर्यादा

मर्यादाओं के रेशम ओढ़े मैंने जीवन काट लिया,सबकी थाली भरते-भरते अपने हिस्से छाँट लिया।जिनको अर्पित स्वप्न किए थे वे ही मुझसे दूर हुए,राजमहल की चाह न थी फिर क्यों सपने चूर हुए?पीड़ा के इस शोक तटों पर कब तक दीप जलाऊँ।कितने गीत लिखूँ मैं तुम पर कितना ...

Kavi Raju Dhakad सरल
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