कुछ सफेदी सी है बालों में,कुछ सिलवटें भी हैं गालों पे।कुछ आँखों की रोशनी जाती सी,कुछ अब भी बाकी है।यादें सारी ख़त्म हुईं,पर बातें अब भी बाकी हैं।उम्र ने धीरे-धीरेबहुत कुछ छीन लिया हमसे,मगर दिल के किसी कोने मेंकुछ जज़्बात अब भी बाकी हैं।तेरे साथ उम...

नहीं, तू है जैसी… वैसा बनना है मुझे,पर तू जैसी भी है… वैसा बनना है मुझे।तेरे होने का एहसास हर वक़्त रहता है,नहीं है अकेली तू… तेरा साया कहता है।भोली सी, प्यारी सी… तू कितनी मासूम सी,थोड़ी सी अनजान… थोड़ी सी मालूम सी।जगाती थीं मुझे… फिर एक नयी सुबह...

कोई शिकवा नहीं, कोई फ़रियाद नहींअब मुझे कुछ भी याद नहींकरनी है ज़िंदगी आबाद मुझेगुज़रे माज़ार की तरह बर्बाद नहींएक फ़ितूर सा है हर वक़्त, हर लम्हाबस खुश रहना चाहे भीड़ हो या हो तन्हाशिकायतों की लड़ी है काफ़ी बड़ीपर गले लगाना है मुझे मेरी हसीं ज़िं...

पहले मेरे लिए सुबह का कोई मतलब नहीं था…Alarm बजता था, मैं snooze कर देती थी…फिर guilt… फिर वही भाग-दौड़… और पूरा दिन जैसे हाथ से फिसल जाता था।मुझे लगता था — “शायद मैं disciplined इंसान नहीं हूँ…”लेकिन सच यह था कि मैंने कभी खुद को समझने की कोशिश ही...
