
नहीं, तू है जैसी… वैसा बनना है मुझे,
पर तू जैसी भी है… वैसा बनना है मुझे।
तेरे होने का एहसास हर वक़्त रहता है,
नहीं है अकेली तू… तेरा साया कहता है।
भोली सी, प्यारी सी… तू कितनी मासूम सी,
थोड़ी सी अनजान… थोड़ी सी मालूम सी।
जगाती थीं मुझे… फिर एक नयी सुबह के लिए,
तेरे हर लफ्ज़ में थी… दुआ मेरे सफर के लिए।
देर जो हो जाए… तुझे चिंता सताती थी ,
तुझे रात दिन फ़िक्र मेरी.... पर मन में छुपाती थीं l
मुझसे ही सुबह शुरू… मुझपे ही रात खत्म होती तेरी,
मेरी सहेली… मेरी हर बात की भागीदार तू मेरी।
आँखों से ओझल… मुझे न देती तू होने,
चोट लगती मुझे… पर लगती तू रोने।
हर चोट का मरहम… तेरे पास है माँ,
इस दुनिया में मेरे लिए… तू सबसे ख़ास है माँ।