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बस मुस्कुराना है मुझे...

कोई शिकवा नहीं, कोई फ़रियाद नहीं

अब मुझे कुछ भी याद नहीं

करनी है ज़िंदगी आबाद मुझे

गुज़रे माज़ार की तरह बर्बाद नहीं

एक फ़ितूर सा है हर वक़्त, हर लम्हा

बस खुश रहना चाहे भीड़ हो या हो तन्हा

शिकायतों की लड़ी है काफ़ी बड़ी

पर गले लगाना है मुझे मेरी हसीं ज़िंदगी—मेरे सामने है खड़ी

गुज़रा हुआ वक़्त बना गया सख़्त मुझे

अब खुशियाँ ही देगा आने वाला वक़्त मुझे

होगा सुहाना मेरा सफ़र—है यक़ीन

फिर भी दिल के कोने में एक ठेस है कहीं

पुराने सफ़र का हर दर्द लेकर साथ चलूँ या

नए रास्तों का थामे हाथ चलूँ

कोई कहता है—पुराने दिन बहुत याद आते हैं

कोई कहता है—गुज़रे ज़माने याद आते हैं

पर मैं क्या कहूँ

अब तो लगता है बस चुप ही रहूँ

ठान लिया है अब सिर्फ़ मुस्कुराना है मुझे

खुद भी हँसना है, लोगों को हँसाना है मुझे......

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