बिन स्वस्थ जीवन व्यर्थ है,पैसे रखकर भी सुख नहीं।आज की जीवन शैली,हर ओर बाज़ार के खान-पान।स्वस्थ तन, स्वस्थ मन—जीवन का यह अनमोल रतन।नित प्रतिदिन हम इसे सँवारें,सवेरे उठकर योग से जुड़ें।रखें ध्यान अपना हम,शुद्ध आहार लेकर संयम की राह चलें।विश्व स्वास्...
शीर्षक — : विरह मेरी भी सुन लो…तुम्हें आना होगा मेरे साथ,क्योंकि थक गई हूँ पीछे भाग-भाग के,अब एक ठहराव की ज़रूरत है माधव।तुम्हारी पदचापों कोअपने हृदय में समेटते-समेटते।अब एक ऐसा ठहराव चाहिएजहाँ तुम हो,और प्रतीक्षा न हो।जो हमने महसूस किया,जो हर पल ...