बिन स्वस्थ जीवन व्यर्थ है,
पैसे रखकर भी सुख नहीं।
आज की जीवन शैली,
हर ओर बाज़ार के खान-पान।
स्वस्थ तन, स्वस्थ मन—
जीवन का यह अनमोल रतन।
नित प्रतिदिन हम इसे सँवारें,
सवेरे उठकर योग से जुड़ें।
रखें ध्यान अपना हम,
शुद्ध आहार लेकर संयम की राह चलें।
विश्व स्वास्थ्य दिवस का संकल्प लेकर,
मानव जीवन का सृजन करें।
खाने की हर वस्तु में मिलावट का
हम सब मिलकर विरोध करें,
जागरूक हो हर एक व्यक्ति,
ऐसा कोई अभियान शुरू करें।
दूध-दही हो या हरी सब्ज़ी,
या हो सूखा अनाज,
हर चीज़ में मिलावट से
दूषित हो रहा आज का समाज।
स्वास्थ्य को हानि पहुँचाकर
कुछ लोग जेबें अपनी भर रहे,
मानवता को बचाने को
अब जागरूक होने की ज़रूरत है।
स्वच्छ परिवेश ही स्वास्थ्य की नींव है,
जागरूकता ही सुखद जीवन है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर
समाज को मिलावट-मुक्त करना है।
7 अप्रैल 1948 को
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना हुई,
मानवता को स्वस्थ रखने का
एक महान अभियान शुरू हुआ।
स्वरचित
रंजीता भारती श्री
सीतामढ़ी,बिहार