मे कइसे भुलाहव तोला मोर सास अउ ज़िन्दगी तोर ये ||जे बोलत हव गोठियावत हव जो सोचत हव कर पावत हव ||तोर ले ही तो सब पाए हव मया, प्रेम के सूघघर बोली |सब के सुख दुख के संगवारी तोर शिक्षा ला धरे अपनाये हव ||मोर देवता तो तै अस बाबू मोर ज़िंदगी ला बनाये हस |...

मन अंधीयारी बाहिर उज्जर पीरा भीतरी बाहिर सूघघर ||रोवव मय हा भीतरी भीतरीबाहिर ले हासी के पुतरी ||अपन पीरा काला बतावव करथे सब झन हसीं ठिठोली ||जेकर पीरा ओहि हा जाने अउ कोनो ला मतलब नई हे |दूसर के ज़िन्दगी ले संगी ||कइसे कोनो देखे सकही मोर मन के भीतरी...
