
मन अंधीयारी बाहिर उज्जर
पीरा भीतरी बाहिर सूघघर ||
रोवव मय हा भीतरी भीतरी
बाहिर ले हासी के पुतरी ||
अपन पीरा काला बतावव
करथे सब झन हसीं ठिठोली ||
जेकर पीरा ओहि हा जाने
अउ कोनो ला मतलब नई हे |
दूसर के ज़िन्दगी ले संगी ||
कइसे कोनो देखे सकही
मोर मन के भीतरी संगी ||
मन अधियारी बाहिर उज्जर
पीरा भीतर बाहिर सूघघर ||